BilaspurChhattisgarh

धांधली का गढ़ बना महाविद्यालय: प्राचार्य पर फर्जी डिग्री धारकों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप.. अनियमित भर्ती को लेकर जांच की मांग

रामानुजगंज(पृथ्वीलाल केशरी)…शासकीय लरंगसाय पीजी महाविद्यालय, रामानुजगंज की प्रभारी प्राचार्य रोस लिली बड़ा पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षकों और स्टाफ ने उन्हें तानाशाही रवैये, पक्षपातपूर्ण नियुक्तियों, जनभागीदारी समिति की राशि के दुरुपयोग और मानसिक प्रताड़ना जैसी शिकायतों में घेरा है। शिकायत पत्र कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज सहित उच्च शिक्षा विभाग रायपुर को भेजा गया है।

शिकायत में कहा गया है कि कॉलेज में 14 जुलाई 2025 को स्व-वित्तीय योजना के तहत कंप्यूटर विज्ञान विभाग में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह नियम विरुद्ध रही। आरोप है कि न तो मेरिट सूची सार्वजनिक की गई, न ही चयन प्रक्रिया की कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। इसके विपरीत, पूर्व में कार्यरत अतिथि शिक्षक पंकज विश्वकर्मा को केवल इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने प्राचार्य की मनमानी और अनियमितताओं का विरोध किया था।

आरोप है कि प्राचार्य रोस लिली बड़ा कॉलेज को व्यक्तिगत लाभ का केंद्र बना चुकी हैं। उनके निकट सहयोगियों को ही लाभ पहुंचाने के लिए नियुक्तियां की जा रही हैं। उदाहरण स्वरूप, अंग्रेजी विषय की अतिथि शिक्षिका के अवकाश पर जाने के दौरान इतिहास विषय के व्याख्याता आदित्य कुमार दास की बहन प्रियंका दास को नियमों को दरकिनार कर नियुक्त किया गया। बताया गया है कि जनभागीदारी प्रबंधन समिति का गठन 3 जुलाई 2025 को हुआ, जबकि प्राचार्य ने दावा किया कि नियुक्ति की अनुशंसा समिति की बैठक 16 मई को कर दी गई थी। यह रिकॉर्ड में हेराफेरी और नियुक्ति में धांधली को दर्शाता है।

इतिहास व्याख्याता आदित्य कुमार दास पर भी फर्जी एम.फिल डिग्री का आरोप लगाया गया है, लेकिन प्राचार्य द्वारा उन्हें लगातार संरक्षण दिया गया। इसी तरह वाणिज्य विभाग के अतिथि व्याख्याता पवन सिंह के खिलाफ शिकायतों और तोड़फोड़ के आरोपों को भी दबा दिया गया।

कॉलेज के वर्तमान माहौल को लेकर शिकायत में कहा गया है कि “जो प्राचार्य का समर्थन करेगा वही सुरक्षित रहेगा,” जिससे कॉलेज का शैक्षणिक वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छात्रों और स्टाफ में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

शिकायतकर्ता पंकज विश्वकर्मा ने उच्च शिक्षा विभाग को भेजे पत्र में विस्तार से अपनी बात रखी और कहा कि नियम विरुद्ध तरीके से हटाया जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने अपने साथ हुई प्रताड़ना को सार्वजनिक करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब प्राचार्य पर ऐसे आरोप लगे हों। इससे पहले भी मानसिक प्रताड़ना और अनियमितता के आरोप सामने आए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस बार आरोपों के साथ आधिकारिक पत्राचार और तिथि-वार दस्तावेज भी लगाए गए हैं, जिससे मामला गंभीर हो गया है।

अब नजरें जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग पर हैं कि क्या इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी, या मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

Back to top button