
रसूलाबाद: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में उत्तर प्रदेश के रसूलाबाद कस्बे में सोमवार शाम को शिक्षकों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (UTA) के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं झींझक रोड तिराहे पर एकत्रित हुए और वहां से मुख्य चौराहे तक ‘मशाल जुलूस’ निकाला। हाथों में जलती मशालें और “TET अनिवार्यता समाप्त करो” की मांग वाली तख्तियां लिए शिक्षक सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
“2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नियम थोपना गलत”
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह ने मशाल जुलूस का नेतृत्व करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय पूर्णतः अनुचित और शिक्षक विरोधी है। उन्होंने तर्क दिया कि:
- वर्ष 2009 (RTE लागू होने) से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों पर अब पात्रता परीक्षा थोपना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
- दशकों से स्कूलों में शिक्षा की लौ जला रहे अनुभवी शिक्षकों को बार-बार परीक्षा के दायरे में लाना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाना है।
- इस नियम से प्रदेश के हजारों शिक्षकों की सेवा और वरिष्ठता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
शिक्षक हितों की अनदेखी का आरोप
जुलूस के दौरान शिक्षकों ने साफ तौर पर कहा कि उनकी वर्षों की सेवा और अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने मांग की कि शिक्षक विरोधी नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो रसूलाबाद से शुरू हुआ यह विरोध एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा।
संगठन ने कसी कमर
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। इस मशाल जुलूस में मुख्य रूप से शिव गोविंद सिंह, रिचा कटियार, अख्तर हुसैन, नागेन्द्र वर्मा, अमित मिश्रा, सुशील कुमार और सर्वेश कुमार सहित भारी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।





