छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के लंबित हक और अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर प्रदेश के दिग्गज शिक्षक नेता एक मंच पर आए हैं। शिक्षाकर्मी से शासकीय शिक्षक के संविलियन तक के ऐतिहासिक सफर में अग्रणी भूमिका निभाने वाले केदार जैन, संजय शर्मा और वीरेंद्र दुबे ने ‘शिक्षक संघर्ष मोर्चा’ के गठन का बड़ा ऐलान किया है।

12 अगस्त 2026 को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में लिए गए इस निर्णय के साथ ही शिक्षकों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मोर्चा के नेताओं ने आत्मविश्वास के साथ नारा दिया है— ‘हमने दिलाया है, हम ही दिलाएंगे’, जो शिक्षकों के बीच एक नई ऊर्जा और एकजुटता का संचार कर रहा है।

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इस नए मोर्चे की सक्रियता का आगाज 18 अगस्त 2026 से होने जा रहा है, जब मोर्चा के प्रांतीय संचालकों के नेतृत्व में नया रायपुर स्थित मंत्रालय में शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और डीपीआई संचालक को अपनी मांगों का पुलिंदा सौंपा जाएगा।

शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह केवल शुरुआत है; यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश व्यापी बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। संगठन की रणनीति के तहत जल्द ही संभाग, जिला और विकासखंड स्तर पर बड़ी बैठकें बुलाई जाएंगी, ताकि गांव-गांव तक फैले शिक्षक संवर्ग को इस निर्णायक संघर्ष से जोड़ा जा सके।

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शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपनी मांगों में सबसे प्रमुखता से सेवारत शिक्षकों के लिए पदोन्नति में टीईटी (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने की बात रखी है। मोर्चा का तर्क है कि जब शिक्षकों को 2028 तक की छूट पहले ही मिली हुई है, तो वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया में इस शर्त को थोपना अनुचित है।

इसके साथ ही, शिक्षकों की सबसे पुरानी और बुनियादी मांग— ‘प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना’ को भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि उनकी पूर्व सेवा को आधार मानकर पुरानी पेंशन सहित सभी विभागीय लाभ प्रदान किए जाने चाहिए, जो उनका वैधानिक अधिकार है और इसे उच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी है।

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वेतन विसंगति का मुद्दा भी इस संघर्ष की मुख्य धुरी है। मोर्चा ने मांग की है कि शिक्षकों के वेतन का निर्धारण केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप किया जाए ताकि वर्षों से चली आ रही आर्थिक असमानता खत्म हो सके।

इसके अलावा, 13 फरवरी 2026 को जारी राजपत्र में भर्ती और पदोन्नति नियमों में जो विसंगतियां मौजूद हैं, उन्हें दूर करने और व्याख्याता व प्राचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए डी.एड (D.Ed) प्रशिक्षित शिक्षकों को विभागीय स्तर पर बी.एड (B.Ed) ब्रिज कोर्स कराने की भी मांग रखी गई है। इससे हजारों अनुभवी शिक्षकों के लिए तरक्की के रास्ते खुल सकेंगे।

इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में गिरजा शंकर शुक्ला, सुधीर प्रधान, धर्मेश शर्मा, चंद्रशेखर तिवारी, देवनाथ साहू, संतोष टांडे और जितेंद्र शर्मा जैसे अनुभवी शिक्षक नेता शामिल रहे। मोर्चा के गठन ने छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में हलचल पैदा कर दी है। शिक्षकों का मानना है कि खंड-खंड में बंटे रहने के बजाय एक मजबूत मोर्चे के तहत लड़ने से ही सरकार पर दबाव बनाया जा सकेगा। 18 अगस्त को होने वाला प्रदर्शन इस नए संगठन की ताकत और भविष्य की दिशा तय करेगा, जिस पर प्रदेश के हजारों शिक्षकों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।