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Chhattisgarh

teacher suspend- शराब पीकर स्कूल आने वाले प्रधानपाठक और शिक्षक सस्पेंड

प्रशासन की इस कार्रवाई से पूरे जिले के लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि स्कूल परिसर में मौजूद प्रधानपाठक और सहायक शिक्षक की हालत और चाल-ढाल सामान्य नहीं थी।

teacher suspend/मनेंद्रगढ़/छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां ज्ञान के मंदिर में बच्चों को भविष्य का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक ही नशे में धुत पाए गए। मनेंद्रगढ़ विकासखंड के प्राथमिक शाला बाला में पदस्थ प्रधानपाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह को ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाए जाने पर कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

teacher suspend/प्रशासन की इस कार्रवाई से पूरे जिले के लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि स्कूल परिसर में मौजूद प्रधानपाठक और सहायक शिक्षक की हालत और चाल-ढाल सामान्य नहीं थी।

संदेह होने पर जब अधिकारियों ने सख्ती से जांच की, तो पाया गया कि दोनों गुरुजी भारी नशे में झूम रहे थे। अधिकारियों ने जब मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए, तो दोनों शिक्षकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन किया है। स्कूल जैसी पवित्र जगह पर इस तरह की अनुशासनहीनता देख अधिकारी भी दंग रह गए।

teacher suspend/मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना किसी ढिलाई के दोनों शिक्षकों को तुरंत मेडिकल परीक्षण के लिए मनेंद्रगढ़ के सिविल अस्पताल भेजा। अस्पताल से जारी आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई कि दोनों शिक्षकों के शरीर में अल्कोहल मौजूद था।

शराब के नशे में बच्चों के बीच पहुंचना न केवल अनैतिक था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 और 23 का खुला उल्लंघन भी था।

teacher suspend/पूरी जांच रिपोर्ट और मेडिकल प्रमाणों के आधार पर कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निलंबन अवधि के दौरान दोनों शिक्षकों का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।

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