सरकारी स्कूल में करंट से छात्र झुलसा, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब: “बच्चों की सुरक्षा क्या किस्मत पर?”

बिलासपुर…सेंदरी के प्राथमिक स्कूल में एक छात्र के करंट की चपेट में आने की घटना ने पूरे राज्य में सरकारी स्कूलों की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। झुलसे छात्र की खबर मीडिया में आने के बाद, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लिया और राज्य सरकार से सीधा सवाल पूछा — “45 हजार स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा?”
बारिश और बिजली के बीच फंसा मासूम
13 जुलाई को स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) ने पाया कि स्कूल की छत पर बारिश का पानी जमा था, जिससे दीवारें पूरी तरह गीली हो गई थीं। इसी दीवार से सटी एलटी लाइन गुजर रही थी — जिससे करंट रिसकर बच्चे को झटका लगा।
सीएसपीडीसीएल की तकनीकी टीम ने तुरंत वायर काटकर करंट प्रवाह बंद किया और इंश्युलेटर व वायरिंग की खामियां दुरुस्त कीं। लेकिन सवाल वही है — पहले क्यों नहीं देखा गया?
हाई कोर्ट का निर्देश: कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने हलफनामे में बताया कि राज्य में 45,000 से अधिक स्कूल हैं, जिनमें से कई में हाईटेंशन लाइन, रिसाव और जर्जर वायरिंग जैसी समस्याएं हैं।
विभाग ने सभी स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाने के लिए दो महीने का समय मांगा है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता।”
बिजली विभाग की सफाई
बिजली विभाग ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि इंश्युलेटर और वायरिंग की गड़बड़ी के चलते दीवारों में करंट आ रहा था, जिसे अब पूरी तरह ठीक कर दिया गया है।





