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Bilaspur

मंगला–उस्लापुर के बीच ‘श्रीवास भवन’ बना शोर का अड्डा..बोर्ड परीक्षाओं के बीच आदेश बेअसर, कहा है पुलिस 

क्या शहर में नियम सब पर समान लागू होते हैं या कुछ स्थान कानून से ऊपर हैं?

बिलासपुर..शादियों का मौसम है, लेकिन उससे बड़ा समय बोर्ड परीक्षाओं का है। सरकार ने साफ निर्देश दिए—परीक्षा अवधि में ध्वनि-विस्तारक यंत्रों पर सख्ती बरती जाए। इसके बावजूद मंगला चौक से उस्लापुर के बीच स्थित कॉलोनी क्षेत्र में ‘श्रीवास भवन’ देर रात तक हाई-पिच डीजे और आतिशबाज़ी के शोर से गूंजता रहा।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय पहले ही रात 10 बजे के बाद ध्वनि-विस्तारक यंत्रों की सीमा तय कर चुका है। आदेश स्पष्ट है। नियम साफ हैं। फिर भी ज़मीन पर खुलेआम उल्लंघन जारी है।

आदेश कागज़ पर, मैदान में मनमानी

कॉलोनिवासियों का आरोप सीधा है—पुलिस आती है, खानापूर्ति करती है, फिर सब पहले जैसा शुरू हो जाता है। कार्रवाई का ढोल बजता है, लेकिन डीजे की आवाज़ उससे भी ऊंची सुनाई देती है।

बोर्ड परीक्षार्थी घरों में किताब खोलकर बैठते हैं, बाहर बेस की धड़कन दीवारें हिलाती है। आतिशबाज़ी रात की शांति तोड़ती है। सवाल उठता है—क्या छात्रों की पढ़ाई से बड़ा कोई निजी आयोजन है?

फोन पर भरोसा, जमीन पर सन्नाटा

स्थानीय लोगों ने सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कई बार फोन किए। जवाब मिला—देखते हैं। मौके पर असर नजर नहीं आया। खबर लिखे जाने तक ध्वनि-विस्तारक यंत्र पूरी ताकत से चलते रहे।

यदि पुलिस को सूचना मिलती है और फिर भी शोर जारी रहता है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, जिम्मेदारी से पलायन है। कानून का डर खत्म होगा तो आदेश महज औपचारिकता बनकर रह जाएंगे।

कॉलोनिवासियों का सब्र टूटा

मुख्य मार्ग पर स्थित इस भवन में देर रात भीड़ जुटती है। डीजे की धुन सड़क तक फैलती है। महिलाओं और बुजुर्गों की आवाजाही प्रभावित होती है। रहवासी अब साफ कह रहे हैं—यदि प्रशासन तुरंत रोक नहीं लगाता, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

यह मुद्दा किसी एक कार्यक्रम का नहीं है। यह सवाल है—क्या शहर में नियम सब पर समान लागू होते हैं या कुछ स्थान कानून से ऊपर हैं?

पुलिस और प्रशासन को तय करना होगा—बोर्ड परीक्षाओं की गंभीरता समझेंगे या फिर कॉलोनिवासियों को न्याय के लिए फिर अदालत जाना पड़ेगा। अब सिर्फ चेतावनी नहीं, ठोस कार्रवाई की मांग उठ रही है। लोग पूछ रहे हैं कि कहां है पुलिस।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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