बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण और शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में नियमों और प्रक्रियाओं के पालन को लेकर कई आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसी मामले को लेकर अब शिकायतकर्ता यशपाल कुमार चौबे ने राज्यपाल के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति में प्राचार्य कामेश्वर वैरागी, प्राचार्य सतीश कश्यप और एबीईओ दीप्ती गुप्ता शामिल थे। समिति ने 31 अगस्त 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े आदेशों एवं अभिलेखों की जांच के आधार पर कई प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट को आगे लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कलेक्टर और संभागीय समिति द्वारा जिन युक्तियुक्तकरण अभ्यावेदनों को खारिज किया गया था, उनमें से कुछ मामलों को बाद में तत्कालीन DEO स्तर से दोबारा स्वीकार किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि ऐसा करने के लिए सक्षम अनुमोदन या नए वैधानिक आधार का रिकॉर्ड जांच में स्पष्ट नहीं मिला। उपलब्ध रिपोर्टों में भी सक्षम समिति के निर्णय के बाद मामलों को दोबारा खोले जाने और संबंधित दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने का उल्लेख है।

पदोन्नति से जुड़े मामलों में भी जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने के कारण स्वतः निरस्त हो चुके कुछ पदस्थापना आदेशों में बाद में संशोधन किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे कुछ शिक्षकों को मनचाही जगह पदस्थापना का लाभ मिला। उपलब्ध रिपोर्टों में भी स्वतः निरस्त आदेशों में बाद में संशोधन और पदस्थापना प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं की बात सामने आई है।

इसी तरह वरिष्ठता और पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि पुरानी प्रतीक्षा सूची का इस्तेमाल करते हुए वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार कर कनिष्ठ शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया तथा काउंसलिंग और विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इन आरोपों की वास्तविक जिम्मेदारी और नियमों के उल्लंघन का अंतिम निर्धारण संबंधित सक्षम विभागीय अथॉरिटी की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू कथित न्यायालयीन आदेशों के उल्लेख से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ प्रशासनिक आदेशों को सही ठहराने के लिए उच्च न्यायालय के ऐसे निर्देशों का उल्लेख किया गया, जिनका संबंधित मामलों में कोई आदेश उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट में भी संबंधित उच्च न्यायालय के मामलों के संदर्भ और दस्तावेजों में पुनर्विचार आदेश नहीं मिलने को लेकर सवाल दर्ज होने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता यशपाल कुमार चौबे ने राज्यपाल को भेजी शिकायत में मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने तत्कालीन DEO विजय टांडे तथा संबंधित न्यायालयीन शाखा के कर्मचारियों की भूमिका की जांच, आवश्यक होने पर निलंबन और विजिलेंस जांच की मांग रखी है। साथ ही शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जांच में सामने आए तथ्यों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि युक्तियुक्तकरण, पदोन्नति और संशोधित पदस्थापना से जुड़े जिन आदेशों को जांच में नियमविरुद्ध पाया जाता है, उनकी समीक्षा कर उन्हें निरस्त किया जाए। इसके अलावा कार्रवाई में देरी या लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पूर्व DEO या संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद ही माना जा सकता है। फिलहाल जांच रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं और शिकायतकर्ता की मांगों के बाद अब शिक्षा विभाग और उच्च स्तर के अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर नजर रहेगी।