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SECL Dependent Employment News,परिवार में पहले से नौकरी होने के आधार पर आवेदन खारिज करना अवैध

बिलासपुर हाई कोर्ट ने कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए बने वैधानिक समझौतों की व्याख्या मनमाने ढंग से नहीं की जा सकती।

SECL Dependent Employment News,बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोल इंडिया और एसईसीएल (SECL) में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लेकर एक ऐतिहासिक व्यवस्था दी है।

न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (NCWA) के तहत मिलने वाली आश्रित नौकरी को महज इस आधार पर नहीं ठुकराया जा सकता कि परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से नौकरी में है। हाई कोर्ट ने कोल इंडिया को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के पक्ष में 45 दिनों के भीतर निर्णय सुनिश्चित करे।

“बाहरी आधार पर अस्वीकृति मनमानी और अवैध”

​कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि जब कोई कर्मचारी सेवा के दौरान दिवंगत होता है, तो उसका आश्रित NCWA की सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत रोजगार का वैध हकदार बन जाता है।

जस्टिस प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जब तक NCWA के समझौते में कोई स्पष्ट अयोग्यता (Disqualification) न लिखी हो, तब तक विभाग अपनी मर्जी से किसी बाहरी कारण का हवाला देकर आश्रित को नौकरी से वंचित नहीं कर सकता। ऐसा करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

13 साल के संघर्ष के बाद मिला न्याय

​याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार की मां, स्वर्गीय भगवानिया, राजनगर ओपन कास्ट माइंस में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत थीं। 7 मई 2011 को सेवाकाल के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई थी। सरकारी रिकॉर्ड में सुरेंद्र का नाम आश्रित के रूप में दर्ज था। मां की मृत्यु के बाद सुरेंद्र ने 9 सितंबर 2011 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

​हालांकि, अप्रैल 2012 में एसईसीएल के अधिकारियों ने बिना किसी ठोस कारण के उनके आवेदन को खारिज कर दिया। बार-बार निवेदन करने के बावजूद विभाग ने कोई तर्कसंगत आदेश जारी नहीं किया, जिसके बाद सुरेंद्र ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

NCWA की वैधानिक शक्ति

​सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चंद्रेश श्रीवास्तव ने दलील दी कि NCWA केवल एक नीति नहीं है, बल्कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(p) के तहत एक बाध्यकारी वैधानिक समझौता है। यह समझौता कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है और इसे लागू करना प्रबंधन के लिए अनिवार्य है। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए माना कि सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) के माध्यम से बने इन नियमों की अनदेखी करना कानून की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

हाई कोर्ट ने प्रबंधन को दिए ये निर्देश

  1. नियुक्ति पर विचार: एसईसीएल प्रबंधन याचिकाकर्ता को उसकी माता पर आश्रित होने के नाते रोजगार प्रदान करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे।
  2. समय सीमा: आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
  3. रिकॉर्ड पेशी: मामले से संबंधित संपूर्ण आधिकारिक अभिलेखों की समीक्षा की जाए ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

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