मनरेगा और धान पर सड़क की लड़ाई: कांग्रेस का धरना, फिर नेशनल हाईवे जाम
मनरेगा ‘कमजोर’ और धान खरीदी ‘अधूरी’: कांग्रेस ने नेशनल हाईवे पर दिखाई ताकत

बिलासपुर…महात्मा गांधी की शहादत दिवस पर मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर सीधा संघर्ष छेड़ दिया। बेलतरा के पूर्व प्रत्याशी और मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला प्रभारी विजय केशरवानी के नेतृत्व में पहले बड़ा धरना दिया गया और इसके बाद नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर सरकार की नीतियों के खिलाफ खुला ऐलान कर दिया गया कि अब सिर्फ ज्ञापन नहीं, सड़क की लड़ाई होगी।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि के साथ हुई, लेकिन इसके बाद मंच से उठी आवाजें बेहद तीखी थीं। विजय केशरवानी ने कहा कि मनरेगा कोई दया योजना नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार द्वारा बनाया गया कानून है, जिसने ग्रामीण गरीबों को 100 दिन रोजगार की गारंटी दी। इसी योजना ने पलायन रोका, गांवों में काम दिया और कोरोना काल में छत्तीसगढ़ के गरीबों को भुखमरी से बचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से ही इस योजना को खत्म करना चाहते थे और अब नाम बदलकर, शर्तें बढ़ाकर और फंडिंग उलझाकर मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
विजय केशरवानी ने कहा कि भाजपा 125 दिन रोजगार देने का दावा कर रही है, लेकिन यह नहीं बता रही कि जब राज्य सरकारें कर्ज में डूबी हैं तो 40 प्रतिशत हिस्सेदारी कहां से आएगी। उन्होंने इसे मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के साथ धोखा बताया और कहा कि यह योजना को कागजों में खत्म करने की चाल है।
धरना समाप्त होने के बाद हजारों की संख्या में कांग्रेसजन हाथों में झंडे लेकर पैदल मार्च करते हुए नेशनल हाईवे की ओर बढ़े। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए जब कांग्रेसजन मुख्य मार्ग पर पहुंचे तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस प्रशासन पहले से तैनात था और जाम खुलवाने के प्रयास करता रहा, लेकिन कांग्रेसजन निर्धारित समय तक सड़क पर डटे रहे। इस दौरान एक एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के निकलने दिया गया, जिससे आंदोलन के बीच मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई दी।
धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए विजय केशरवानी ने कहा कि सरकार ने 2025-26 के लिए 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य तय किया था। लेकिन शर्तों और अव्यवस्था के चलते अब तक केवल लगभग 120 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हो सकी है। करीब 40 लाख मीट्रिक टन धान आज भी किसानों के घरों और खलिहानों में पड़ा है। इसके बावजूद सरकार खरीदी की तारीख नहीं बढ़ा रही, लिमिट नहीं बढ़ा रही और ऑनलाइन सिस्टम में रकबा जीरो कर किसानों को बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसान कर्ज लेकर खेती करता है और धान नहीं बिकने की स्थिति में वह कर्जदार होता जा रहा है। यह नीति किसानों को खेती से बाहर करने और उन्हें मजदूर बनने पर मजबूर करने की है। विजय केशरवानी ने विष्णुदेव साय सरकार को किसान विरोधी बताते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द धान खरीदी की तारीख और लिमिट नहीं बढ़ाई गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आंदोलन में कांग्रेस के जिला, ब्लॉक और मोर्चा स्तर के पदाधिकारी, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस सहित बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए।




