RJD on Nitish Kumar Rajya Sabha,राज्यसभा जाने की चर्चा पर मनोज झा का CM पर तीखा तंज; बिहार में महाराष्ट्र जैसा ऑपरेशन होने का दावा

RJD on Nitish Kumar Rajya Sabha।पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। सत्ता के गलियारों में चल रही इन चर्चाओं पर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कड़ा ऐतराज जताया है।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि यह फैसला बिहार से नहीं, बल्कि दिल्ली से लिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए हैं।
“नीतीश कुमार को डिमोट करने का ‘ऑपरेशन'”
मनोज झा ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में इस पूरे घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा:
”पिछले 20 साल से वे मुख्यमंत्री हैं और अब देखिए कि उनसे क्या-क्या कहलवाया जा रहा है। मैंने पहले भी कहा था कि यह सब अंदाजे के दायरे में था। अब मैं कह रहा हूं कि एक ‘ऑपरेशन’ हुआ है। यह महाराष्ट्र में जो हुआ, उसका एक तात्कालिक संस्करण है। वहां, एकनाथ शिंदे को डिमोट कर दिया गया था, लेकिन उसी सेटअप में रखा गया। बिहार में भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश हो रही है।”
“शब्दों में एक अजीब-सी पराई गूंज”
मनोज झा ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर किए गए हालिया पोस्ट पर आपत्ति जताई। उन्होंने इस पोस्ट को ‘बचकाना’ बताते हुए कहा:
”तमाम बातें अपनी जगह, लेकिन यह नीतीश कुमार की भाषा नहीं है। विरोध और समर्थन दोनों में हम उनके साथ रहे हैं। यह सोशल मीडिया पोस्ट दिल्ली में लिखा गया है। यह सुनना भी कितना हास्यास्पद लगता है कि सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मैं राज्यसभा जाना चाहता हूं।”
झा ने ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपने आरोपों को और हवा दी। उन्होंने लिखा:
”यह मान लेने में शायद ही किसी को संशय हो कि यह पोस्ट नीतीश कुमार की अपनी आवाज नहीं लगती। शब्दों में एक अजीब-सी पराई गूंज है, जैसे वाक्य कहीं और रचे गए हों और यहां केवल उनका पाठ किया गया हो। इसमें तो साफ-साफ दिल्ली दरबार की कलम की आहट सुनाई देती है।”
“शब्द भी अब प्रवासी हो गए हैं”
आरजेडी सांसद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे विचार देश की राजधानी के किसी शांत, सुव्यवस्थित कक्ष में लिखे गए हों, फिर उन्हें किसी ‘अदृश्य दूत’ ने पटना पहुंचा दिया हो। उन्होंने राजनीति के इस नए व्याकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब शब्द भी प्रवासी हो गए हैं—विचार कहीं जन्म लेते हैं, स्वर कहीं और दिया जाता है और श्रेय उस नाम को मिलता है जिसकी मुहर सबसे सुविधाजनक होती है। उन्होंने अंत में ‘जय हिन्द, जय बिहार’ के नारे के साथ अपनी बात खत्म की।
बिहार में ‘प्रयोग’ सफल होने पर संदेह
मनोज झा ने स्पष्ट किया कि उन्हें संदेह है कि बिहार की धरती पर महाराष्ट्र की तरह यह राजनीतिक प्रयोग सफल हो पाएगा। उन्होंने कहा कि इस ‘ऑपरेशन’ की गूंज कई वर्षों तक सुनी जाएगी, लेकिन बिहार की जनता ऐसे किसी भी फैसले को आसानी से स्वीकार नहीं करेगी जो राज्य के बाहर से थोपा गया हो।
यह मान लेने में शायद ही किसी को संशय/संकोच हो कि यह पोस्ट नितीश कुमार जी की अपनी आवाज़ नहीं लगती। शब्दों में एक अजीब-सी पराई गूंज है, जैसे वाक्य कहीं और रचे गए हों और यहाँ केवल उनका पाठ किया गया हो। इसमें तो साफ़-साफ़ दिल्ली दरबार की क़लम की आहट सुनाई देती है। लगता है जैसे… https://t.co/QC682RSyL6
— Manoj Kumar Jha (@manojkjhadu) March 5, 2026





