LIVE UPDATE
EducationChhattisgarh

टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार याचिका खारिज, देश भर में उथल-पुथल… शिक्षक संगठन चिंतित … पदोन्नति में हो सकती है दिक्कत ..अब फैसला केंद्र और राज्य सरकार के पाले में

सूरजपुर (मनीष जायसवाल)।टीईटी की अनिवार्यता को लेकर स्थिति अब देश भर में साफ है, लेकिन इसके बाद भी शिक्षक वर्ग में असमंजस और बेचैनी बढ़ती जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उन्हें 1 सितंबर 2027 तक टीईटी उत्तीर्ण करना ही होगा, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा। जिनकी सेवा में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें छूट तो मिलेगी लेकिन वे पदोन्नति के योग्य नहीं होंगे..।

मिल रही जानकारी के मुताबिक कुछ राज्यों की ओर से दायर की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में खारिज कर दिया है, जिसके बाद यह निर्णय देशभर में लागू माना जा रहा है। कुछ राज्यों ने इसके विरोध में केंद्र से दखल की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप से मना कर दिया है। इस बीच कुछ राज्य, जैसे तमिलनाडु, अपने स्तर पर विशेष टीईटी आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि सेवारत शिक्षकों को परीक्षा देने का अवसर मिल सके।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि अचानक आई इस अनिवार्यता से देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी संकट में पड़ सकती है..। उनका तर्क है कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए एक ही परीक्षा के आधार पर सेवा समाप्त करना न्यायोचित नहीं है..।उनकी पुरानी सेवा का अनुभव एक योग्यता परीक्षा नहीं होनी चाहिए।

इसी विषय पर चर्चा करते हुए प्राथमिक प्रधान पाठक संघ के शिक्षक नेता निर्मल भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के शिक्षक नेता विजय साहू, शिक्षक नेता विजय तिवारी से हुई इस विषय पर लंबी चर्चा में यह बात निकल कर आती है कि यह मुद्दा सिर्फ एक राज्य या एक संगठन का नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक संगठन शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंतित है।

जिले के शिक्षक नेताओं का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार इस मामले में कोई ठोस नीति नहीं बनाती, तब तक राज्य सरकारें नीतिगत निर्णय लेते हुए विभागीय स्तर पर ही टीईटी जैसी परीक्षा आयोजित करें। उनका कहना है कि विभागीय टीईटी का पाठ्यक्रम और पैटर्न व्यापम परीक्षाओं से अलग होना चाहिए, ताकि कार्यरत शिक्षक अपनी सेवा के साथ इसे आसानी से पूरा कर सकें।

शिक्षक नेता निर्मल भट्टाचार्य और शिक्षक नेता विजय साहू बताते है कि अभी स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रभावी है, NCTE के नियम जस के तस लागू हैं, और केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव की कोई घोषणा नहीं की है। ऐसे में लाखों शिक्षकों की निगाहें अब राज्य सरकारों की ओर हैं, जिनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने स्तर पर राहत देने या विभागीय टीईटी आयोजित करने पर फैसला लेंगी। वही अन्य शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह समय फैसले का नहीं, समाधान खोजने का है, ताकि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों दोनों की गरिमा बनी रहे..।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Back to top button
close