बिलासपुर।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में जमीन, क्रशर प्लांट और मशीनरी से जुड़े लगभग 4.39 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से साफ इंकार कर दिया है.

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) के गंभीर आरोप बनते हैं, इसलिए मामले की पुलिस जांच को शुरुआती स्तर पर रोकना उचित नहीं होगा.

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए पुलिस को मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जारी रखने का निर्देश दिया है.

यह पूरा मामला भिलाई नगर निगम की कांग्रेस पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद्र सिंह और बेटे मानव चंद्र सिंह से जुड़ा हुआ है.

उतई थाने में बीते 2 अगस्त को अदालत के निर्देश पर पीड़ित बीबी सिंह की शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.

याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि उन्होंने वर्ष 2008 में 15 जमीनों के टुकड़े खरीदे थे, जिनमें से 7 की रजिस्ट्री हुई थी और 8 पर एग्रीमेंट के जरिए कब्जा लिया गया था. बाद में 29 फरवरी 2024 को क्रशर प्लांट और मशीनरी का समझौता कर दूसरे पक्ष को कब्जा सौंपा गया था।

जिसके बाद बिजली बिल और माइनिंग देनदारियों को लेकर विवाद हुआ. उन्होंने इसे केवल एक सिविल व व्यापारिक विवाद बताते हुए एफआईआर निरस्त करने का अनुरोध किया था.

वहीं, शिकायतकर्ता बीबी सिंह ने आरोप लगाया था कि समझौते में दिखाई गई कुछ जमीनें तीसरे पक्ष की थीं, कुछ सरकारी लीज की थीं और कुछ संपत्तियों पर याचिकाकर्ताओं के पास बेचने या हस्तांतरित करने का कानूनी अधिकार ही नहीं था. इसके अलावा, लगभग 4.39 करोड़ रुपये के भुगतान, दस्तावेजों में हेरफेर और हस्ताक्षरों के गलत इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी विवाद में सिविल मुकदमा लंबित होना आपराधिक जांच पर रोक लगाने का आधार नहीं बन सकता.

आरोपों की सत्यता का फैसला पुलिस जांच और अदालती ट्रायल से ही संभव है. कोर्ट ने उतई पुलिस को जमीन के राजस्व और पंजीयन रिकॉर्ड, सरकारी लीज, खनन अनुमति, पॉवर ऑफ अटॉर्नी, बैंक ट्रांजैक्शन और विवादित हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत और पारदर्शी जांच करने का आदेश दियाहै.