मोबाइल ऐप खोला और खुलती चली गई चोरी की परतें, पुलिस कप्तान की निगरानी में सामने आया सच
लावारिस समझे गए वाहन, मोबाइल ऐप ने खोल दी असली कहानी

बिलासपुर…शहर में लावारिस खड़े वाहनों को अब हल्के में नहीं लिया जा रहा। तोरवा और तारबहार थाना क्षेत्र में की गई डिजिटल जांच के दौरान तीन ऐसे दोपहिया सामने आए, जिनके तार पहले से दर्ज चोरी के मामलों से जुड़े पाए गए। यह खुलासा मोबाइल ऐप के जरिए की गई जांच में हुआ, जिसने सड़क किनारे खड़े वाहनों की असल कहानी सामने रख दी।
तोरवा थाना क्षेत्र में लावारिस हालत में खड़ी स्कूटी प्लेजर क्रमांक सीजी 04 सीएक्स 7848 की जांच करने पर पता चला कि यह वाहन रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज चोरी के एक पुराने मामले से संबंधित है। इसी इलाके में मिली एक्टिवा क्रमांक सीजी 04 एमबी 2782 भी रायपुर के गंज थाना में दर्ज चोरी के प्रकरण से जुड़ी निकली।
इसी क्रम में तारबहार थाना क्षेत्र में खड़ी मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 10 ईडी 6156 की जांच की गई, तो यह वाहन चकरभाठा थाना क्षेत्र में दर्ज चोरी के मामले से संबंधित पाया गया।
शहर में लगातार सामने आ रहे वाहन चोरी के मामलों को देखते हुए पुलिस अब लावारिस और संदिग्ध वाहनों की पहचान के लिए डिजिटल साधनों का अधिक उपयोग कर रही है। यही वजह है कि इस बार केवल खड़ी गाड़ियों को जब्त करने तक सीमित न रहते हुए, उनके पीछे की पूरी पृष्ठभूमि खंगाली गई।
पुलिस कप्तान रजनेश सिंह के नेतृत्व में चोरी गए वाहनों की पहचान और उनके आपराधिक रिकॉर्ड को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले में यह संदेश साफ है कि अब चोरी की फाइलें ठंडी नहीं पड़ेंगी और हर कड़ी को जोड़कर कार्रवाई की जाएगी।
तीनों वाहनों से जुड़ी जानकारी संबंधित थानों को भेज दी गई है, ताकि आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। पुलिस का मानना है कि इस तरह की डिजिटल जांच से वाहन चोरी के नेटवर्क तक पहुंच आसान होगी।





