अब नहीं चलेगा ‘चुपचाप कारोबार’: पेट शॉप्स पर कड़ा फरमान—लाइसेंस लो, टैक्स दो या कार्रवाई झेलो”
“बिलासपुर में ‘पेट माफिया’ पर वार: बिना लाइसेंस बिक रहे जीव अब टैक्स जाल में, पशुपालन विभाग का सख्त एक्शन”

बिलासपुर ..शहर में पालतू पशुओं का कारोबार अब तक लगभग अनियंत्रित तरीके से चलता रहा—जहां देसी-विदेशी पक्षियों से लेकर कछुओं तक की खुलेआम खरीद-फरोख्त होती रही, लेकिन न लाइसेंस, न टैक्स और न ही किसी तरह की ठोस निगरानी। अब इस पूरे सिस्टम पर प्रशासन ने सख्त शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।
संयुक्त संचालक पशुधन विभाग, बिलासपुर ने आदेश जारी करते हुए जिले में संचालित सभी पेट शॉप और डॉग ब्रीडिंग सेंटर का सर्वे शुरू कर दिया है। स्पष्ट निर्देश है—हर संचालक को पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा सख्त कार्रवाई तय है।
अब तक किए गए सर्वे में शहर की करीब 20 पेट दुकानों की पहचान की गई है। इनमें से 10 दुकानों को लाइसेंस जारी कर दिया गया है, जबकि शेष दुकानों से आवेदन मंगाकर प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि लाइसेंस बनने के बाद इन व्यवसायों को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा, जिससे अब तक बिना टैक्स चल रहे इस कारोबार पर भी निगरानी और राजस्व नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
हैरानी की बात यह है कि अब तक इन दुकानों में न केवल कुत्ते-बिल्ली जैसे सामान्य पालतू जानवर, बल्कि विदेशी पक्षी, एक्वेरियम प्रजातियां और कछुए जैसे जीवों की भी खरीद-फरोख्त होती रही, लेकिन किसी तरह का औपचारिक रिकॉर्ड या टैक्स व्यवस्था लागू नहीं थी। यही वजह है कि अब प्रशासन इस पूरे सेक्टर को व्यवस्थित करने के लिए एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई कर रहा है।
लाइसेंस प्राप्त दुकानों में जरहाभाठा स्थित आराध्या पेट शॉप, शिव टंकी चौक के पास पेट मान्य और अन्य एक्वेरियम, सिंधी कॉलोनी की पेट प्वाइंट, बस स्टैंड स्थित नरगी एक्वेरियम, राजकिशोर नगर की एनिमल्स बर्ड और पेट साहब, तोरवा की एक्वा पेट शॉप और पुराना बस स्टैंड की नई जीत एक्वेरियम शामिल हैं। शेष दुकानों के लाइसेंस की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक संयुक्त टीम बनाई गई है, जिसमें राजस्व, पुलिस, नगर निगम और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम दुकानों की वास्तविक स्थिति की जांच कर रिपोर्ट देगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि बिना लाइसेंस पेट शॉप या डॉग ब्रीडिंग सेंटर संचालित करते पाए जाने पर सीधे पुलिस कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इन व्यवसायों की पूरी जानकारी शासन और जीएसटी विभाग को भेजी जाएगी।
इस सख्ती के साथ बिलासपुर प्रदेश का तीसरा ऐसा बड़ा शहर बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां पालतू पशुओं के व्यापार को पूरी तरह लाइसेंस और नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। साफ है—अब यह कारोबार अनियंत्रित नहीं, बल्कि नियमों के तहत चलेगा और हर गतिविधि प्रशासन की नजर में होगी।





