सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब सजा तय—हत्या मामलों में आईजी का नया फार्मूला लागू
हत्या केस में ‘फूलप्रूफ’ जांच का दावा, आईजी ने लागू किया सख्त प्रोटोकॉल

बिलासपुर…हत्या के मामलों में जांच की गुणवत्ता और अदालत में दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए बिलासपुर रेंज पुलिस ने अब सख्त और वैज्ञानिक ढांचा लागू कर दिया है। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने 28 अप्रैल को आयोजित प्रशिक्षण सत्र में स्पष्ट कर दिया—लक्ष्य सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनिश्चित करना है।
वैज्ञानिक जांच पर जोर, ‘स्मार्ट विवेचना’ लागू
रेंज स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में ASP से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी जुड़े। नई कार्यप्रणाली के तहत हत्या के हर मामले में अब एक अनिवार्य चेकलिस्ट लागू होगी, जिसके बिना चार्जशीट पेश नहीं की जा सकेगी। 124 बिंदुओं वाले इस प्रोटोकॉल में FIR से लेकर अंतिम चालान तक हर चरण का सटीक दस्तावेजीकरण तय किया गया है।
ई-साक्ष्य और वीडियो रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत अब हर जब्ती की प्रक्रिया ‘e-Sakshya’ ऐप के जरिए वीडियोग्राफी के साथ होगी। इससे गवाहों के मुकरने की स्थिति में भी तकनीकी साक्ष्य अदालत में मजबूती देंगे।
क्राइम सीन पर ‘गोल्डन ऑवर’ प्रबंधन
घटनास्थल को तुरंत सील करने, फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉड की मौजूदगी में साक्ष्य जुटाने और बिना दस्ताने किसी भी वस्तु को छूने पर रोक जैसे निर्देश दिए गए हैं। जांच की शुरुआती घड़ी को निर्णायक मानते हुए हर गतिविधि नियंत्रित और रिकॉर्डेड रहेगी।
डिजिटल फुटप्रिंट और CCTV मैपिंग पर फोकस
अब जांच एजेंसियां आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट—Google Takeout, इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स—की गहराई से जांच करेंगी। घटनास्थल के 100 किमी दायरे में CCTV कैमरों की मैपिंग ‘त्रिनयन’ ऐप के जरिए होगी और फुटेज सीधे DVR से जब्त कर विधिक प्रमाण के साथ केस डायरी में जोड़ी जाएगी।
DNA साक्ष्य और फॉरेंसिक लिंकिंग प्राथमिकता में
मृतक के नाखून, बाल, कपड़ों से DNA सैंपल लेकर आरोपी से वैज्ञानिक लिंक स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। इससे घटनास्थल पर आरोपी की मौजूदगी को तकनीकी रूप से साबित किया जा सकेगा।
पोस्टमार्टम.. अब तकनीकी निगरानी में
संवेदनशील मामलों में रात के समय पर्याप्त रोशनी में पोस्टमार्टम और उसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। रिपोर्ट में अस्पष्टता होने पर डॉक्टरों से FSL क्वेरी कराई जाएगी।
रिकार्ड किया जाएगा
साक्ष्य के संग्रह से लेकर FSL तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का हर चरण रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो।
सभी मामलों में अनिवार्य लागू
आईजी ने साफ निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद दर्ज होने वाले सभी हत्या प्रकरणों में यही वैज्ञानिक प्रोटोकॉल लागू होगा। CCTNS एंट्री से लेकर CDR, IPDR, IMEI जैसे साइबर साक्ष्यों तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और पेशेवर तरीके से संचालित होगी।
हर सप्ताह होगा प्रशिक्षण, किया जाएगा अपग्रेड
प्रशिक्षण सत्र वर्चुअल मोड में आयोजित हुआ, जिसमें मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल सहित सभी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। आईजी ने खुद PPT के जरिए जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझाया और स्पष्ट किया कि ऐसे प्रशिक्षण हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर आयोजित होंगे, ताकि विवेचना में कोई कमी न रह जाए।





