no scope for lockdown- लॉकडाउन लगेगा या नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब, जानें पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर क्या कहा

no scope for lockdown/पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के बीच भारत में फैली लॉकडाउन और महंगाई की आशंकाओं पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को राज्यसभा में देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत में लॉकडाउन लगने की कोई गुंजाइश नहीं है और न ही सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ आम जनता पर डालने वाली है।
वित्त मंत्री ने विपक्षी नेताओं और अफवाह फैलाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनता के मन में भय पैदा करने वाली निराधार बातें बंद होनी चाहिए, क्योंकि भारत की आर्थिक स्थिति पड़ोसी देशों की तुलना में काफी मजबूत और स्थिर है।
वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने वैश्विक संकट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण दुनिया भर के कई देशों में ईंधन की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, लेकिन भारत सरकार ने अपनी नीतियों के माध्यम से घरेलू कीमतों को स्थिर रखा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि सरकार का एकमात्र मार्गदर्शक सिद्धांत यह है कि ‘हमारे नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।’ इसी नीति के तहत सरकार ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को 13 रुपये से घटाकर मात्र 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर लगने वाले 10 रुपये के उत्पाद शुल्क को पूरी तरह समाप्त यानी शून्य कर दिया गया है।
वित्त मंत्री ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें देश में फिर से लॉकडाउन लगाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लॉकडाउन की खबरें महज अफवाहें हैं। यह पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में हो रहा है, भारत में नहीं।” उन्होंने राजनेताओं से अपील की कि वे देश की 140 करोड़ जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखें और विकास के कार्यों में बाधा डालने वाली गलतफहमियां न फैलाएं।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पूरी तरह सक्रिय है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति में होने वाली अनियमितताओं के प्रभावों से आम आदमी को बचाने के लिए निर्यात शुल्क बढ़ाने जैसे कड़े कदम भी उठा रही है।
राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को लेकर उठाए गए सवालों पर जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार 2026 के लिए तय 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के प्रति आश्वस्त है। उन्होंने बताया कि सरकार के कुल राजस्व में उत्पाद शुल्क का योगदान केवल 10 प्रतिशत होता है, और इसकी भरपाई गैर-कर राजस्व और अन्य साधनों के माध्यम से की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता विकासोन्मुखी खर्चों को बढ़ावा देना और कल्याणकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जीएसटी या अन्य करों में अमीर और गरीब के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया है और सरकार राजकोषीय कामकाज में पूरी पारदर्शिता बरत रही है।





