नवा रायपुर जंगल सफारी में निजीकरण की कोशिशों पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल सख्त; बोले- ‘श्रमिकों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं’
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि जंगल सफारी में पिछले 10 से 15 वर्षों से कई वाहन चालक और गाइड अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि बस संचालन का कार्य टेंडर के माध्यम से निजी एजेंसियों को सौंप दिया जाता है, तो इन अनुभवी कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा। कर्मचारियों को डर है कि निजीकरण के बाद वे भविष्य में होने वाले नियमितीकरण और अन्य शासकीय लाभों से भी पूरी तरह वंचित हो जाएंगे।

रायपुर। नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी में बस संचालन कार्य को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव ने वहां कार्यरत कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर ‘छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की और अपनी समस्याओं एवं भविष्य की चिंताओं से अवगत कराया।
सांसद अग्रवाल ने कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में सालों से सेवा दे रहे श्रमिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी और उनकी आजीविका पर संकट नहीं आने दिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि जंगल सफारी में पिछले 10 से 15 वर्षों से कई वाहन चालक और गाइड अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि बस संचालन का कार्य टेंडर के माध्यम से निजी एजेंसियों को सौंप दिया जाता है, तो इन अनुभवी कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा। कर्मचारियों को डर है कि निजीकरण के बाद वे भविष्य में होने वाले नियमितीकरण और अन्य शासकीय लाभों से भी पूरी तरह वंचित हो जाएंगे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस विषय को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि जो कर्मचारी अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष विभाग को दे चुके हैं, उन्हें इस तरह अधर में छोड़ना कतई न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने विभाग के तर्क कि ‘बसों के मेंटेनेंस में समस्या है’ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि निजीकरण इसका समाधान नहीं है।
अग्रवाल ने सुझाव दिया कि पुरानी बसों की मरम्मत करवाकर उन्हें पुनः संचालन में लाना एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का सदुपयोग होगा, बल्कि कर्मचारियों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा।
सांसद अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे मामले को राज्य शासन के समक्ष मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमेशा से श्रमिकों, कर्मचारियों और आम जनमानस के हितों के प्रति संकल्पित रही है। किसी भी प्रशासनिक निर्णय में मानवीय पक्ष को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी अपील की है कि वे इस दिशा में संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसा बीच का रास्ता निकालें, जिससे सफारी की व्यवस्था भी सुचारु बनी रहे और कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी न हो।




