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भ्रष्टाचार के 7,000 से अधिक मामले अदालतों में लंबित

भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार के कुल 2,281 मामले 10 वर्ष से अधिक और 20 वर्ष से कम समय से लंबित थे जबकि 379 मामले 20 वर्ष से अधिक समय से लंबित थे।

दिल्ली/ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से संबधित भ्रष्टाचार के 7,072 मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। यह जानकारी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में दी गई।

सीवीसी ने बताया कि इनमें से 379 मामले 20 वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं।

आयोग के अनुसार 31 दिसंबर, 2024 तक कुल मामलों में से 1,506 मामले तीन साल से कम समय से, 791 मामले तीन साल से अधिक और पांच साल से कम समय से, और 2,115 मामले पांच साल से अधिक और 10 साल से कम समय से लंबित थे।

भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार के कुल 2,281 मामले 10 वर्ष से अधिक और 20 वर्ष से कम समय से लंबित थे जबकि 379 मामले 20 वर्ष से अधिक समय से लंबित थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह पाया गया कि 31 दिसंबर 2024 तक 7,072 मामले सुनवाई के लिए लंबित थे। यह चिंता का विषय है कि 2024 के अंत तक 2,660 मामले 10 वर्षों से अधिक समय से लंबित थे।’

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आरोपियों की 13,100 अपीलें/संशोधन अनुरोध विभिन्न उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।

सीवीसी के अनुसार 606 अपीलें/संशोधन अनुरोध 20 वर्ष से अधिक समय से, 1,227 अपीलें/संशोधन अनुरोध 15 वर्ष से अधिक लेकिन 20 वर्ष से कम समय से, 2,989 अपीलें/संशोधन अनुरोध 10 वर्ष से अधिक लेकिन 15 वर्ष से कम समय से, 4,059 अपीलें/संशोधन अनुरोध पांच वर्ष से अधिक लेकिन 10 वर्ष से कम समय से, 1,778 अपीलें/संशोधन अनुरोध दो वर्ष से अधिक लेकिन पांच वर्ष से कम समय से तथा 2,441 अपीलें/संशोधन अनुरोध दो वर्ष से कम समय से लंबित हैं।

सीवीसी ने बताया कि साल 2024 के दौरान 644 मामलों में फैसला सुनाया गया।

इनमें से 392 मामलों में दोषसिद्धि हुई, 154 मामलों में दोषमुक्ति हुई, 21 मामलों में आरोपी बरी हुए और 77 मामलों का ‘अन्य कारणों से निपटारा’ किया गया। पिछले साल दोषसिद्धि की दर 69.14 प्रतिशत थी, जबकि 2023 में यह 71.47 प्रतिशत रही थी।

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