Middle East Crisis India Impact: इजरायल-ईरान युद्ध,जाने विदेश मंत्री एस. जयशंकर का डिप्लोमैटिक मिशन
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने इजरायली और ईरानी समकक्षों से बात की। दोपहर में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से बात करने के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने "तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति के लिए भारत के आह्वान" को दोहराया। बाद में, ईरान के सैयद अब्बास अरघची से बात करने के बाद उन्होंने कहा कि वे "ईरान और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर भारत की गहरी चिंता" से सहमत हैं।

Middle East Crisis India Impact, Iran-Israel War News/पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से रवाना होने के 40 घंटे के भीतर ही क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने कतर, बहरीन और यूएई (UAE) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
इस भीषण टकराव ने भारत के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ भारत का रणनीतिक साझेदार इजरायल है, तो दूसरी तरफ पुराना सहयोगी और पड़ोसी देश ईरान। इस बीच, भारत की सबसे बड़ी चिंता वहां रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को लेकर है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ‘डिप्लोमैटिक मिशन’
Middle East Crisis India Impact, Iran-Israel War News/युद्ध की स्थिति को देखते हुए भारत ने तुरंत सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को इजरायल और ईरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की।
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इजरायल से संवाद: जयशंकर ने इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार से बात कर तनाव कम करने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।
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ईरान से चर्चा: ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची के साथ बातचीत में भारत ने क्षेत्र में बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता जताई।
इसके अलावा, जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र के अन्य साझेदारों—यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन के विदेश मंत्रियों को भी फोन किया और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
भारत के रुख के 3 मुख्य बिंदु/Middle East Crisis India Impact
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस संकट पर भारत का पक्ष रखते हुए तीन प्रमुख बातें कही हैं:
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नागरिकों की सुरक्षा: भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
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संप्रभुता का सम्मान: भारत ने क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान का आह्वान किया है, जिसे ईरान पर हुए हमलों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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संवाद और कूटनीति: भारत का मानना है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, केवल कूटनीति ही शांति ला सकती है।
90 लाख भारतीय और ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ पर खतरा
भारत के लिए यह संकट केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय भी है।
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भारतीय समुदाय: अनुमान के मुताबिक, पूरे खाड़ी क्षेत्र में 80 से 90 लाख भारतीय रहते हैं। अकेले इजरायल में 41,000 और ईरान में 10,000 भारतीय (छात्रों सहित) मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा भारत की पहली प्राथमिकता है।
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तेल की आपूर्ति: भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता है। ईरान द्वारा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह तेल टैंकरों का मुख्य रास्ता है।
रूस-यूक्रेन जैसी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’
Middle East Crisis India Impact, Iran-Israel War News/विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस संकट में भी वही रणनीति अपना रहा है जो उसने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अपनाई थी। इसे ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) कहा जाता है। भारत न तो पूरी तरह इजरायल के साथ खड़ा है और न ही ईरान के खिलाफ। भारत का एकमात्र उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनकर शांति स्थापित करना है।





