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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कंप्यूटर प्रेमियों की पहली पसंद बना जियो-पीसी

मात्र 599 रुपये में घर आएगा हाई-एंड कंप्यूटर अब हर TV बनेगा कंप्यूटर

भोपाल-रायपुर।मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कंप्यूटर की चाह रखने वाले लोगों के बीच रिलायंस जियो का ‘जियो-पीसी’ (Jio-PC) खासा लोकप्रिय हो रहा है। यह एक अत्याधुनिक क्लाउड-आधारित वर्चुअल डेस्कटॉप है, जो आपके घर या दफ्तर में मौजूद साधारण टीवी स्क्रीन को पल भर में एक पावरफुल पर्सनल कंप्यूटर में बदल देता है। जियो की यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो कम खर्च में बेहतर कंप्यूटिंग अनुभव चाहते हैं। और साथ ही इस सुविधा में कोई मेंटनेंस भी नहीं लगता।

जिन ग्राहकों के पास पहले से जियोफाइबर या जियो एयरफाइबर के कनेक्शन मौजूद हैं, वे मासिक प्लान लेकर इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, नए उपयोगकर्ताओं के लिए कंपनी ने एक विशेष ऑफर पेश किया है, जिसके तहत वे इस सेवा का एक महीने तक निःशुल्क उपयोग कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म न केवल रोजमर्रा के दफ्तरी कामकाज के लिए उपयुक्त है, बल्कि इसकी शानदार प्रोसेसिंग क्षमता के कारण इस पर गेमिंग और ग्राफिक रेंडरिंग जैसे भारी काम भी आसानी से किए जा सकते हैं।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह तकनीक बेहद किफायती है। बाजार में जियो-पीसी जैसी क्षमता वाला कंप्यूटर खरीदने पर 50 हजार रुपये से अधिक का खर्च आता है, जबकि जियो-पीसी के प्लान मात्र 599  रुपये + GST प्रति माह से शुरू होते हैं। इस तरह ग्राहक एक बड़ी एकमुश्त राशि की बचत कर सकते हैं। इस सब्सक्रिप्शन के साथ यूजर्स को सभी प्रमुख एआई (AI) टूल्स, एप्लिकेशन्स और 500 GB तक का क्लाउड स्टोरेज भी दिया जा रहा है।

ग्राहकों की सुविधा के लिए कंपनी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अपने सभी जियो आउटलेट्स पर किफायती दामों में डिजिटल कीबोर्ड और माउस भी उपलब्ध करा रही है। इसका सेटअप भी अत्यंत सरल है; ग्राहकों को केवल डिजिटल कीबोर्ड और माउस को जियो सेट-टॉप बॉक्स से जोड़ना होगा और टीवी स्क्रीन पर जियो-पीसी ऐप लॉन्च कर लॉग-इन करना होगा।
सुरक्षा के लिहाज से भी जियो-पीसी काफी भरोसेमंद है। यह नेटवर्क-स्तरीय सुरक्षा प्रदान करता है, जो इसे वायरस, मैलवेयर और हैकिंग से सुरक्षित रखता है। इसके माध्यम से की जाने वाली ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, क्लासेज और वर्क-फ्रॉम-होम का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। ग्राहक अपनी व्यक्तिगत फोटो और वीडियो भी क्लाउड में सुरक्षित रख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार स्टोरेज को बढ़ा भी सकते हैं।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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