जशपुर ने खोया अपना जननेता: पूर्व विधायक नहीं रहे…जनसेवा का एक अध्याय समाप्त
आदिवासी समाज की आवाज थमी: पूर्व विधायक जागेश्वर राम भगत का निधन

जशपुर ..छत्तीसगढ़ के जशपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। पूर्व विधायक जागेश्वर राम भगत का निधन हो गया। उनके जाने से जिले की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे भगत का इलाज जारी था, लेकिन अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजनीति से आगे समाज में गहरी पकड़
जागेश्वर राम भगत केवल राजनीतिक चेहरा नहीं थे, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। वनवासी कल्याण आश्रम की सरहुल समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के लिए लगातार काम किया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही, जो जमीनी मुद्दों को समझते और समाज के बीच सक्रिय रहते थे।
सरल स्वभाव, मजबूत जनसंपर्क
जशपुर और आसपास के इलाकों में भगत को एक सहज, सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। यही वजह रही कि वे क्षेत्र में लोकप्रिय जननेता के रूप में स्थापित हुए और लोगों के बीच उनका सीधा जुड़ाव बना रहा।
शोक की लहर, श्रद्धांजलि का दौर
उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में शोक का माहौल बन गया। कई जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया और इसे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
एक युग का विराम
जागेश्वर राम भगत का जाना केवल एक पूर्व विधायक का निधन नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के जननेतृत्व का अंत है, जिसने राजनीति को समाज सेवा से जोड़कर देखा। जशपुर की राजनीतिक और सामाजिक धारा में उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।




