शिक्षा के अधिकार पर चोट: हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों से मांगा जवाब. दो सप्ताह में जवाब देना होगा

बिलासपुर…प्रदेशभर के निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्रहित से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। ईडब्ल्यूएस आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कैटेगरी से जुड़ी मेडिकल छात्रा प्रतीक्षा जांगड़े द्वारा दायर जनहित याचिका पर मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कॉलेज के ट्रांसपोर्ट और हॉस्टल जैसी सुविधाओं का उपयोग न करने के बावजूद प्रबंधन द्वारा छात्रों से लाखों रुपए वसूलने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही कॉलेज फीस रेगुलेटरी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेशभर के निजी मेडिकल कॉलेजों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी और मनमानी वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान सभी मेडिकल कॉलेजों से दो सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया है।
छात्रहित की बड़ी लड़ाई
हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा केवल व्यवसाय नहीं बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए अवसर का माध्यम है। ऐसे में नियमों की अनदेखी कर छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना न केवल अनुचित है बल्कि शिक्षा की मूल भावना के खिलाफ भी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्रों से अनुचित वसूली रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
दो सप्ताह में देना होगा जवाब
अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में जवाब न देने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह सुनवाई निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी पर बड़ा प्रहार मानी जा रही है और इससे छात्रहित में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।





