थानों की पड़ताल: रिकॉर्ड, व्यवहार और व्यवस्था पर आईजी की सीधी जांच
रिकॉर्ड खुले, सवाल उठे और पुलिसिंग को आई आईना

बिलासपुर…पुलिसिंग की हकीकत को कागज़ों से बाहर निकालते हुए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने मंगलवार को जिले के सरकंडा और कोनी थानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह भी मौजूद रहे। यह दौरा औपचारिक नहीं, बल्कि थानों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड संधारण और फरियादियों से व्यवहार की वास्तविक स्थिति जानने पर केंद्रित रहा।
निरीक्षण के दौरान थानों की साफ-सफाई, कर्मचारियों की उपस्थिति, अनुशासन और वेशभूषा की जांच की गई। इसके साथ ही अपराध रजिस्टर, विवेचना से जुड़े दस्तावेज और लंबित मामलों की स्थिति को भी देखा गया। जांच में कुछ रिकॉर्ड और प्रक्रियागत कमियां सामने आईं, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित थानों से सुधार रिपोर्ट भी मांगी गई है।
आईजी ने थानों में मौजूद फरियादियों से सीधे बातचीत कर उनकी शिकायतों की स्थिति जानी। उन्होंने स्पष्ट किया कि थाने में आने वाला व्यक्ति मदद की उम्मीद लेकर आता है, इसलिए शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए कि वैधानिक कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो और पीड़ितों को बार-बार थाने के चक्कर न लगाने पड़ें।
निरीक्षण के दौरान थानों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। पेयजल, साफ-सफाई और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी और सभ्य व्यवहार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी पुलिस महानिरीक्षक ने स्थिति स्पष्ट की। ‘अनुभव’ अभियान के तहत फरियादियों से फीडबैक लेने के लिए क्यूआर कोड लगाने और ‘सशक्त’ ऐप में चोरी व लावारिस वाहनों की जानकारी समय पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। इन बिंदुओं की नियमित मॉनिटरिंग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर पर करने को कहा गया है।
इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया, जहां निर्माणाधीन कार्यालय भवन की प्रगति की समीक्षा की गई। आईजी ने स्पष्ट किया कि थानों की कार्यप्रणाली में सुधार और संवेदनशील पुलिसिंग प्राथमिकता में है और निरीक्षण की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।





