जंगल में आग लगी, तो सिर्फ पेड़ नहीं जलेंगे—हमारा भविष्य भी राख बन जाएगा
में लगातार निगरानी और टीमवर्क बेहद जरूरी

रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी): जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे जंगल में आग लगने और जानवरों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों में जंगलों में लगी आग और अवैध शिकार की घटनाओं ने भारी नुकसान किया है। इन्हीं हालात को देखते हुए वन परिक्षेत्र रामानुजगंज के पवनवादिता क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जंगल की आग और शिकार—दोनों पर रोक की तैयारी
कार्यशाला में वन कर्मचारियों को बताया गया कि जंगल में लगने वाली आग को कैसे रोका जाए, आग लगने की स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए, और जानवरों को पकड़ने के लिए लगाए गए जाल (फंदे) कैसे हटाए जाएं।
वनमंडलाधिकारी आलोक कुमार बाजपेई ने कहा कि गर्मी शुरू होने से पहले सतर्क रहना बहुत जरूरी है, तभी जंगल और जानवर सुरक्षित रहेंगे।
हाल की घटनाओं से मिली सीख
पिछली गर्मियों में राज्य के कई इलाकों में जंगल की आग से पेड़-पौधों के साथ जानवरों को भी नुकसान पहुंचा था। कहीं-कहीं शिकार के मामले भी सामने आए थे। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखकर इस बार पहले से तैयारी करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
वन्य प्राणी विशेषज्ञ प्रभात दुबे ने बताया कि शिकार करने के तरीके बदल रहे हैं, इसलिए जंगल में लगातार निगरानी और टीमवर्क बेहद जरूरी है।
जिले भर से वन अमला मौजूद
कार्यशाला में उपवनमंडलाधिकारी अनिल कुमार सिंह पैकरा, वनपरिक्षेत्राधिकारी निखिल सक्सेना सहित वन सुरक्षा श्रमिक, आग पर नजर रखने वाले कर्मी और हाथी मित्र दल के सदस्य शामिल हुए।





