33 मासूमों से दरिंदगी पर ऐतिहासिक फैसला: विशेष अदालत ने दंपती को फांसी सुनाई, ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार
जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी को विशेष पॉक्सो अदालत ने दिया मृत्युदंड

बांदा (उत्तर प्रदेश)…एक दशक तक बच्चों को शिकार बनाने वाले सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को विशेष पॉक्सो अदालत ने मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने 33 बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले को “अक्षम्य क्रूरता” और “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए कहा कि अपराध इतना घृणित है कि सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
अदालत की सख्त टिप्पणी
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा कि दोषियों का आचरण समाज के मूल्यों पर सीधा प्रहार है। अदालत ने कहा कि जब अपराध संगठित, दीर्घकालिक और मासूमों के खिलाफ हो, तब न्याय व्यवस्था को कठोरतम संदेश देना ही पड़ता है।
सीबीआई जांच में खुलासा
जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने 31 अक्टूबर 2020 को मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि आरोपी बच्चों को ऑनलाइन गेम, पैसे और उपहार का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। 33 पीड़ितों की पुष्टि हुई, जिनमें कुछ की उम्र तीन वर्ष तक थी। मेडिकल रिपोर्टों ने गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की पुष्टि की।
कानूनी धाराएं और दोष सिद्ध
अदालत ने भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत गंभीर यौन हमला, अप्राकृतिक अपराध और बाल अश्लील सामग्री से जुड़े आरोपों को सिद्ध माना। विस्तृत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर कोर्ट ने इसे दुर्लभतम श्रेणी में रखा।
मुआवजा और पुनर्वास का आदेश
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रत्येक पीड़ित को 10–10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। साथ ही अभियुक्तों के घर से बरामद नकदी को भी सभी पीड़ितों में समान रूप से बांटने का आदेश दिया।





