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Madhya Pradesh

नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100 फीसदी महिला आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त, पुरुष उम्मीदवारों को आवेदन की अनुमति

जबलपुर।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर दायर याचिका पर अहम सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल धागत की एकलपीठ ने अंतरिम राहत प्रदान की है।

अदालत ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 800 से अधिक पदों पर हो रही नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में पुरुष अभ्यर्थियों को आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन उम्मीदवारों का परिणाम अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

मामले में जबलपुर निवासी संतोष कुमार लोधी सहित 10 पुरुष अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026 के विज्ञापन में नर्सिंग ऑफिसर के सभी पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है, जिससे योग्य पुरुष उम्मीदवार आवेदन से पूरी तरह वंचित हो गए हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि “मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023” में नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए किसी भी प्रकार का लिंग आधारित प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान नियमों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पुरुष और महिला दोनों समान पाठ्यक्रम जैसे बीएससी नर्सिंग या जीएनएम करते हैं और समान योग्यता एवं पंजीकरण रखते हैं, इसलिए केवल लिंग के आधार पर उन्हें बाहर करना असंवैधानिक है।

याचिका में यह भी कहा गया कि यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन करता है, जो समानता और समान अवसर की गारंटी देते हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि भर्ती विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए, जिसमें सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। फिलहाल अदालत के इस अंतरिम आदेश के बाद पुरुष अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और अब वे भी इस भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

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