दिल्ली।अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ नाम से ही नहीं, बल्कि कर्म और विचार, दोनों से अटल थे। मतांतर को स्वीकार करने और मनांतर को सिरे से नकारने वाले अटल का सार्वजनिक जीवन बेदाग और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने सौंपी गई हर जिम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाया।

कोमल हृदय के बावजूद उनके निर्णयों में अद्भुत राजनीतिक दृढ़ता दिखाई देती थी। देश के आंतरिक मुद्दे हों या वैश्विक मंच पर भारत की बात अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा बेबाकी, स्पष्टता और गरिमा के साथ अपने विचार रखे। इन्हीं विशेषताओं की वजह से उन्हें न सिर्फ अपने दल में, बल्कि सभी राजनीतिक दलों और समाज के हर वर्ग से जीवनभर अपार सम्मान मिला।

ये खबर भी पढ़ें…
कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर बतौली की छात्राओं की पैदल मार्च की घटित घटना के जांच के लिए समिति गठित
कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर बतौली की छात्राओं की पैदल मार्च की घटित घटना के जांच के लिए समिति गठित
अम्बिकापुर/ कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर, विकासखण्ड बतौली की छात्राओं द्वारा 07 सितम्बर 2026 को आयोजित पैदल मार्च की...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

एक कवि, राजनीतिज्ञ, वक्ता होने के साथ-साथ एक भावुक व्यक्तित्व भी थे। उनके राजनीतिक जीवन से इतर आज बात उनके निजी जीवन की बताते हैं, जो गोरखपुर से जुड़ी हुई हैं।

1940 में वे अपने बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी की शादी में पहली बार गोरखपुर सहबाला बनकर आए थे। गोरखपुर के मथुरा प्रसाद दीक्षित की बेटी राजेश्वरी से अटलजी के बड़े भाई प्रेम बिहारी की शादी हुई थी।

ये खबर भी पढ़ें…
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
रायपुर/ शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क,...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अटल बिहारी वाजपेयी के मजाकिया अंदाज से सभी भली-भांति परिचित हैं। एक रिश्तेदार सुनील दीक्षित ने एक इंटरव्यू में बताया, “वे घर की बड़ी बहू, जो बांग्ला जानती थी, को मजाक में ‘खालिदा जिया’ कहते थे। जब वे यहां पर खाना खाने आए तो ऊंचे पद पर होने के बावजूद खुद ही हाथ साफ करते थे। कभी बहू से हाथ नहीं धुलवाए। वही कहते थे, ‘खालिदा जिया’ आप रहने दो।

जब भी अटल बिहारी वाजपेयी गोरखपुर जाया करते थे, खूब खातिरदारी हुआ करती थी। रिश्ते के साले बृज नारायण दीक्षित ने एक इंटरव्यू में कहा था, “वे जब भी आते थे, खूब खाते-पीते थे। वे खुद ही ठंडाई बनाने के लिए चीजें पीसते थे और सभी को पिलाते भी थे। वे खूब गप्पे लड़ाते थे।”

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल,कई जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना, देखिए पूरी लिस्ट 
शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल,कई जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना, देखिए पूरी लिस्ट 
रायपुर ।स्कूल शिक्षा विभाग में  ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों सहित कई प्राचार्यों और शिक्षा विभाग...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

रिश्तेदार सुनील दीक्षित ने इंटरव्यू में बताया कि अटल को खाने-पीने में कढ़ी बहुत पसंद थी। वे कड़ी-चावल अधिक पसंद करते थे। रिश्तेदार सुनील ने बताया, “आज भी उनकी जन्मतिथि के अवसर पर हम लोग सह-परिवार कड़ी-चावल अधिक बनाते हैं।”

असल में बृज नारायण दीक्षित, अटल बिहारी वाजपेयी के भाई के साले थे। इस नाते वे अटलजी को भी जीजा कहा करते थे।

करीबी लोगों का यह भी कहना रहा कि अटल गोरखपुर आने का कोई बहाना छोड़ते नहीं थे। खुद एक बार उनके बड़े भाई प्रेम बाजपेयी ने मजाकिया अंदाज में अटल से बोला था कि ‘ससुराल मेरी है और मजे तुम उड़ाते हो। दामाद मैं और मौज तुम्हारी।”

वाजपेयी एक बेहद मिलनसार और खुले दिल के इंसान थे। राजनीति में होने के बाद भी वे दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर सबसे संबंध रखते थे। उनके इसी मिलनसार स्वभाव और हास-परिहास की शैली के कारण विपक्ष के नेता भी उनके मुरीद हुआ करते थे।

बृज नारायण दीक्षित ने बताया था, “वे (अटलजी) गोरखपुर आया करते थे। जब हम स्कूल में पढ़ते थे तो वे हमें समझाते थे कि खूब मेहनत से पढ़ना। वे हमेशा चटकीली बातें करते थे और कविताएं सुनाते थे। हमारा संबंध जीजा-साले का था। जब भी वे गोरखपुर आते थे, तो सभी से मुलाकात किया करते थे और हालचाल पूछते थे।”

सुनील दीक्षित ने यादें ताजा करते हुए इंटरव्यू में कहा, “जिस तरह देश के लोग थे। अटल बिहारी वाजपेयी हम रिश्तेदारों को भी उन्हीं में गिनते थे, हालांकि पारिवारिक संबंध होने पर जब वे गोरखपुर आते थे तो मिलने के लिए बुला लेते थे। उस समय वे कोई भी बात राजनीतिक तौर पर नहीं करते थे। सिर्फ घरेलू बातें किया करते थे।”

अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया और चार दशकों के अपने शानदार संसदीय करियर में, वे नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। ग्वालियर में एक साधारण परिवार से निकलकर भारत के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले वाजपेयी को राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए 1992 में पद्म विभूषण मिला और 2015 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

वाजपेयी ने लोकतांत्रिक आदर्शों, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का मुखर समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सुशासन और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी, दूरसंचार का विस्तार किया और बुनियादी ढांचे में सुधार किया। उनकी विरासत, शासन के भारत के दृष्टिकोण और पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशलता व नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर ध्यान केंद्रित करने में मार्गदर्शन करती है।

16 अगस्त 2018 को 93 साल की उम्र में अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली एम्स में निधन हुआ।