बिलासपुर… शनिवार सुबह व्यापार विहार स्थित चौधरी एजेंसी में लगी भीषण आग ने करोड़ों रुपये की संपत्ति को राख में बदल दिया। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में पूरा परिसर इसकी चपेट में आ गया। दमकल की टीम को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद अब केवल आग लगने के कारणों पर ही नहीं बल्कि व्यापार विहार में संचालित गतिविधियों, भंडारण व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं।

सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच आसपास के लोगों ने चौधरी एजेंसी के संचालक रमेश कुमार अग्रवाल को फोन कर दुकान में आग लगने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर बाद दमकल की टीम भी व्यापार विहार पहुंच गई। आग की भयावहता को देखते हुए शटर तोड़कर भीतर प्रवेश करना पड़ा और सुबह करीब 9 बजे से लगातार पानी की बौछार शुरू की गई। लंबे प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन देर तक भीतर से धुआं और आग की लपटें निकलती रहीं।

तीन हजार लीटर खाद्य तेल बना आग का ईंधन

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार परिसर में बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का भंडारण किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक करीब 3 हजार लीटर खाद्य तेल आग की चपेट में आ गया। तेल की मौजूदगी के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर को अपनी गिरफ्त में ले लिया। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल कर्मियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। प्रारंभिक आकलन में करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आ रही है।

दुकान चल रही थी या पैकेजिंग यूनिट?

घटना के बाद व्यापार विहार के कई व्यापारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि व्यापार विहार मूल रूप से व्यापारिक गतिविधियों के लिए विकसित क्षेत्र है, जहां खरीद-बिक्री की अनुमति है। यदि किसी परिसर में पैकेजिंग, प्रोसेसिंग अथवा निर्माण जैसी गतिविधियां संचालित हो रही थीं तो इसकी अनुमति किस आधार पर दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए।

व्यापारियों का दावा है कि संबंधित परिसर में लंबे समय से खाद्य तेल की पैकेजिंग का कार्य संचालित हो रहा था और “रसोई किंग” ब्रांड नाम से तेल बाजार में बेचा जाता था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
टीनशेड के नीचे भंडारण पर उठे सवाल

स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि व्यापार विहार में निर्धारित मानकों से अलग अतिरिक्त टीनशेड बनाकर उनका उपयोग गोदाम के रूप में किया जाता है। आरोप है कि चौधरी एजेंसी में भी बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का भंडारण इसी प्रकार किया गया था। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है।

व्यापारियों का यह भी कहना है कि व्यापार विहार में अधिकतम दो मंजिला निर्माण की अनुमति है, लेकिन कई स्थानों पर टीनशेड संरचनाओं का उपयोग अतिरिक्त भंडारण के लिए किया जा रहा है। इस घटना के बाद ऐसे निर्माण भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

फूड सेफ्टी विभाग पर भी उठे सवाल

घटना के बाद व्यापारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि परिसर में बड़े स्तर पर पैकेजिंग अथवा अन्य गतिविधियां संचालित हो रही थीं तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों की निगरानी आखिर किस स्तर पर हुई।

हालांकि अभी तक फूड सेफ्टी विभाग, नगर निगम अथवा अन्य एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
लाइसेंस होने का दावा

चौधरी एजेंसी के संचालक रमेश कुमार अग्रवाल का कहना है कि उनके पास आवश्यक लाइसेंस और वैधानिक अनुमतियां मौजूद हैं। आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है और इसकी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।

अब जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

आग की घटना के बाद तारबाहर पुलिस, नगर निगम और फूड सेफ्टी विभाग सहित संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आग किस कारण से लगी, परिसर में किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही थीं, क्या भंडारण और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था तथा निर्माण संबंधी सभी अनुमतियां वैध थीं या नहीं।

करोड़ों की इस आगजनी ने व्यापार विहार की सुरक्षा व्यवस्था, विभागीय निगरानी और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि यह केवल एक दुर्घटना थी या फिर नियमों की अनदेखी का नतीजा।