सरकारी खरीदी के कागज़ी आंकड़े, ज़मीन पर किसान बेहाल — बेलतरा से उठा बड़ा सवाल
‘ऐतिहासिक धान खरीदी’ का दावा बेनकाब, 3 लाख किसान आज भी कतार में — अंकित गौरहा

बिलासपुर…छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान खरीदी को “ऐतिहासिक” बताए जाने के दावों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। प्रदेश के हजारों किसान आज भी अपनी उपज बेचने के लिए भटक रहे हैं। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नगाई का एक मामला धान खरीदी व्यवस्था में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर करता है।
पंजीयन सही, लेकिन सत्यापन में भारी गड़बड़ी
ग्राम नगाई के किसान भानु प्रकाश शर्मा ने शासन के नियमों के तहत धान उपार्जन केंद्र में अपनी उपज का पंजीयन कराया था। 12 एकड़ 36 डिसमिल भूमि के आधार पर उन्होंने 255.20 क्विंटल धान विक्रय के लिए पंजीयन कराया, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान नोडल अधिकारी द्वारा बड़ी चूक करते हुए धान की मात्रा मात्र 46.80 क्विंटल दर्शा दी गई।
गलती मानी गई, फिर भी सुधार नहीं
किसान ने समय रहते इस त्रुटि को सुधारने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया। नोडल अधिकारी ने स्वयं गलती स्वीकार करते हुए जिला विपणन अधिकारी को सुधार के लिए पत्र भी भेजा, जिसकी पावती किसान को दी गई। इसके बावजूद 30 जनवरी 2026 को धान खरीदी की अंतिम तिथि समाप्त हो गई, लेकिन न तो रिकॉर्ड सुधारा गया और न ही किसान को टोकन जारी किया गया।
धान नहीं बिका, कर्ज़ का बोझ बढ़ा
धान विक्रय न हो पाने के कारण किसान पर सहकारी समिति और बैंक का करीब ₹2,20,742 का कर्ज़ चढ़ गया है। इस स्थिति ने किसान को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। एक तरफ खरीदी बंद, दूसरी तरफ कर्ज़ का दबाव—किसान पूरी तरह असहाय स्थिति में खड़ा है।
3 लाख किसान अब भी इंतज़ार में’ — अंकित
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“सरकार दावा कर रही है कि धान खरीदी ऐतिहासिक है, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में करीब 3 लाख किसानों का धान अब तक नहीं बिक पाया है। क्या यही किसान-हितैषी सरकार का चेहरा है? क्या समर्थन मूल्य सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?”
बेलतरा ही नहीं, कई क्षेत्रों में संकट
अंकित गौरहा ने कहा कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र सहित कई इलाकों में किसान आज भी निर्णय, तारीख और भुगतान के इंतज़ार में खड़े हैं। गलत भौतिक सत्यापन, समय पर सुधार न होना और खरीदी तिथि समाप्त हो जाना किसानों को कर्ज़ और संकट की ओर धकेल रहा है।
कलेक्टर को ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
इस गंभीर स्थिति को लेकर बेलतरा क्षेत्र के किसानों के साथ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में धान खरीदी की तिथि बढ़ाने और बचे हुए सभी किसानों का धान तत्काल खरीदे जाने की मांग रखी गई। अंकित गौरहा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय लेकर किसानों का धान नहीं खरीदा गया तो किसान हित में आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।





