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Eliminate anemia and weakness- सात दिन में शरीर में दौड़ने लगेगा खून, एनीमिया और कमजोरी को जड़ से मिटाएंगे आयुर्वेद के ये तीन खास नियम

सिर दर्द, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होने पर डॉक्टर आयरन की दवा देते हैं, जिससे शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाया जा सके, लेकिन कई बार दवा लेने के बाद भी शरीर एनीमिया की कमी से जूझने लगता है और कई बीमारियां घेर लेती हैं। आज हम आपको आयुर्वेद के उन तीन नियमों के बारे में बताएंगे, जिन्हें सात दिन करने से शरीर में बदलाव देखने को मिल जाएंगे।

Eliminate anemia and weakness/आज के दौर में खान-पान और जीवनशैली में आए बदलावों के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना एक आम समस्या बन गई है।

विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में रक्त की कमी यानी एनीमिया की शिकायत सबसे ज्यादा देखी जा रही है। अक्सर सिर दर्द, अचानक चक्कर आना और हर वक्त कमजोरी महसूस होना इस बीमारी के प्राथमिक लक्षण होते हैं।

हालांकि डॉक्टर इन स्थितियों में आयरन की गोलियां और सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार दवाइयों के बावजूद शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर नहीं बढ़ता और व्यक्ति बीमारियों के चक्रव्यूह में फंसा रहता है। आयुर्वेद में इस समस्या का जड़ से इलाज करने के लिए तीन अत्यंत प्रभावशाली नियम बताए गए हैं, जिनका केवल सात दिनों तक पालन करने से ही शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगता है और रक्त की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।

Eliminate anemia and weakness/आयुर्वेद का पहला नियम ‘पंचामृत’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें रसोई में मौजूद साधारण चीजों के सही उपयोग से रक्त निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि रात के समय दो मुनक्का और दो अंजीर को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट इनका सेवन करें। इसके अतिरिक्त, प्राचीन ग्रंथों में लौह भस्म और शहद के मिश्रण को चाटना रक्त वृद्धि के लिए अचूक माना गया है। सुबह की शुरुआत यदि सफेद पेठे और आंवले के रस से की जाए, तो यह न केवल शरीर को डिटॉक्स करता है बल्कि आयरन के अवशोषण को भी बढ़ाता है। साथ ही, तिल और गुड़ का सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्मी और ऊर्जा देता है।

Eliminate anemia and weakness/रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से पेट साफ रहता है और शरीर में पित्त संतुलित होता है, जिससे नया रक्त बनने में मदद मिलती है।

केवल औषधियों से ही नहीं, बल्कि सही आहार तालिका का पालन करने से भी रक्त की कमी को दूर किया जा सकता है। आयुर्वेद के दूसरे नियम के अनुसार, भोजन में गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, सहजन की पत्तियां और चुकंदर को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। सहजन न केवल आयरन बल्कि विटामिन-सी का भी बड़ा स्रोत है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक है।

फलों की बात करें तो अनार, अंगूर, सेब और खजूर का नियमित सेवन अमृत के समान कार्य करता है। दोपहर के भोजन के साथ ताजी छाछ पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है। हालांकि, इस दौरान कुछ चीजों से परहेज करना भी उतना ही जरूरी है। अत्यधिक तीखी हरी मिर्च, बैंगन, बहुत ज्यादा खट्टे फल और बाजार में मिलने वाले पैक्ड फूड व कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाना आवश्यक है क्योंकि ये रक्त शोधन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं।

आयुर्वेद का तीसरा नियम उन परंपरागत तरीकों को पुनर्जीवित करने पर जोर देता है जो हमारे पूर्वजों की सेहत का राज थे। शरीर में आयरन की प्राकृतिक कमी को पूरा करने का सबसे बेहतरीन तरीका है लोहे के बर्तनों में खाना पकाना।

जब भोजन लोहे की कड़ाही या बर्तन में पकता है, तो उसमें लौह तत्व प्राकृतिक रूप से मिल जाते हैं जो सीधे रक्त कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही ‘सूर्य स्नान’ की महत्ता को भी नकारा नहीं जा सकता। चाहे सर्दी हो या गर्मी, प्रतिदिन सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बिताना शरीर के लिए अनिवार्य है।

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