अंकित गौराहा के आरोपों से शिक्षा विभाग में भूचाल, डीईओ और बाबू पर जांच की आंच..क्लीन चिट देने वाला अधिकारी बना जांचकर्ता
नियुक्ति, अटैचमेंट और प्रमोशन में अनियमितताओं के आरोप; सात दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

बिलासपुर…जिला शिक्षा विभाग में नियुक्ति, अटैचमेंट और प्रमोशन को लेकर उठे कथित भ्रष्टाचार के आरोप अब बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुके हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा की शिकायत के बाद संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा आर.पी. आदित्य ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
संभागीय कार्यालय से जारी पत्र में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करते हुए सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। आदेश सामने आते ही जिला शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई और पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन
संयुक्त संचालक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार जांच समिति में जांजगीर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा, सहायक संचालक जे.के. शास्त्री और बिल्हा विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक को शामिल किया गया है। हालांकि समिति के गठन के साथ ही इसकी निष्पक्षता को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
नियुक्ति और प्रमोशन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
अंकित गौराहा ने शिक्षा विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति प्रक्रिया, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण और प्रमोशन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने संभागायुक्त और संभागीय संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी।
गौराहा का आरोप है कि विभाग में नियमों को दरकिनार कर कई फैसले लिए गए, जिससे पारदर्शिता और प्रशासनिक विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनका यह भी कहना है कि शिकायत के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई और जिला स्तर पर जांच शुरू करने में टालमटोल की गई।
पहली जांच और क्लीन चिट पर उठे सवाल
इस प्रकरण में पहले भी जांच हो चुकी है। तात्कालीन समय कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।
जांच टीम में बिल्हा और मस्तूरी के बीईओ को शामिल किया गया था। जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव को क्लीन चिट दे दी गई।
अंकित गौराहा का आरोप है कि तकनीकी रूप से कोई बीईओ जिला शिक्षा अधिकारी की जांच नहीं कर सकता, इसके बावजूद ऐसी जांच कराकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई।
नई जांच समिति पर भी उठे गंभीर सवाल
संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित नई जांच समिति पर भी अब सवाल खड़े हो गए हैं। गौराहा का कहना है कि समिति में शामिल बिल्हा विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक पहले उसी जांच टीम के सदस्य रह चुके हैं, जिसने विजय टांडे और सुनील यादव को क्लीन चिट दी थी। ऐसे में वही अधिकारी दोबारा जांच समिति में शामिल होकर निष्पक्ष जांच कैसे करेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है।
जांच से हटाने,अधिकारियों को दूर रखने की मांग
अंकित गौराहा ने संयुक्त संचालक से मांग की है कि भूपेंद्र कौशिक को जांच समिति से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को शामिल करते हुए नई तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर भरोसा कायम रह सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच प्रक्रिया के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव को विभागीय कार्यों से पूरी तरह दूर रखा जाए।
आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी
गौराहा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच समिति में बदलाव नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हुई, तो संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा ताकि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।





