विकसित भारत या छूटा हुआ गांव? केंद्रीय बजट पर बिलासपुर में सियासी टकराव
बजट 2026: किसी के लिए उम्मीदों की सौगात, किसी के लिए अधूरी कहानी

बिलासपुर…केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर जिले की राजनीति में स्पष्ट मतभेद उभरकर सामने आए हैं। सत्तारूढ़ पक्ष जहां इसे किसान, युवा और राज्यों के विकास की दिशा में मजबूत कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे गांव, मजदूर और आम नागरिक की अपेक्षाओं से दूर मान रहा है। एक ही बजट पर अलग–अलग दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि आर्थिक दस्तावेज अब केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि नीतिगत सोच और राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी प्रतिबिंब बन चुका है।
धीरेन्द्र दुबे | जिलाध्यक्ष, भाजपा किसान मोर्चा
भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने बजट को किसान हितैषी बताते हुए कहा कि छोटे किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए किए गए प्रावधान स्वागतयोग्य हैं। पशुपालन के लिए लोन पर सब्सिडी, मत्स्यपालन हेतु 500 जलाशयों का विस्तार, कोको, अखरोट और बादाम जैसी फसलों के लिए नई योजनाएं किसानों को वैकल्पिक आय के अवसर देंगी।
उन्होंने ‘भारत-विस्तार’ नामक एआई टूल को अहम पहल बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ी सहित स्थानीय भाषाओं में कृषि सलाह देगा, जिससे तकनीक सीधे खेत तक पहुंचेगी। उनके अनुसार यह बजट किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम है।
महर्षि बाजपेयी..जिला उपाध्यक्ष, भाजयुमो
भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष महर्षि बाजपेयी ने बजट को विकसित भारत की नींव रखने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इसमें छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना, पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड्स का प्रशिक्षण, कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में कटौती और आयुर्वेद व फार्मा शिक्षा संस्थानों की संभावनाओं को उन्होंने राज्य के लिए दूरगामी लाभ वाला बताया। रेल परियोजनाओं में तेजी से बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई।
मनीष अग्रवाल.. पूर्व एल्डरमैन, भाजपा
पूर्व एल्डरमैन मनीष अग्रवाल ने बजट को सर्वसमावेशी करार देते हुए कहा कि नया आयकर अधिनियम, सस्ती दवाइयों के प्रावधान, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि निवेश से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उनके अनुसार यह बजट आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को जमीन पर उतारने वाला है और इससे रोजगार, व्यापार व विकास को नई दिशा मिलेगी।
अरविंद शुक्ला.. कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेता अरविंद शुक्ला ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि सरकार वर्तमान समस्याओं के समाधान के बजाय 2047 के सपनों की बात कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी व्यवस्था, शराब नीति और किसानों की वास्तविक स्थिति पर बजट में कोई ठोस जवाब नहीं है। उनका कहना था कि जमीनी सच्चाई से कटे हुए ऐसे बजट से आम किसान और ग्रामीण वर्ग को राहत नहीं मिल सकती।
त्रिलोक श्रीवास..राष्ट्रीय समन्वयक, कांग्रेस कमेटी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय समन्वयक त्रिलोक चंद्र श्रीवास ने कहा कि देश की 80 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, लेकिन बजट में गांव, किसान और मजदूर के लिए ठोस प्रावधान नजर नहीं आते।
उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा न बढ़ने, शिक्षा बजट में कटौती और टैक्सपेयर्स को राहत न मिलने को बजट की बड़ी कमियां बताया। उनके अनुसार यह बजट आम वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।
बहरहाल केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर बिलासपुर में सियासी रेखा साफ खिंची नजर आती है। सत्ता पक्ष इसे विकास, तकनीक और निवेश का रोडमैप बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे गांव और आम आदमी से दूरी का दस्तावेज मान रहा है। यही विरोधाभास इस बजट की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बनकर सामने आया है।





