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फरियादी बोलेगा, सिस्टम सुनेगा: बिलासपुर रेंज के सभी थानों में ‘अनुभव’ क्यूआर कोड

थाने में क्या हुआ, अब छुपेगा नहीं: बिलासपुर रेंज में जनता के फीडबैक का नया डिजिटल रास्ता

बिलासपुर…थाने की व्यवस्था और पुलिस व्यवहार को लेकर आमजन की राय अब सीधे वरिष्ठ स्तर तक पहुंचेगी। बिलासपुर पुलिस रेंज में इसके लिए ‘अनुभव’ नामक क्यूआर कोड आधारित फीडबैक सिस्टम की शुरुआत की गई है। इस व्यवस्था के तहत कोई भी नागरिक थाना या पुलिस कार्यालय में अपने अनुभव को मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर दर्ज कर सकेगा।

बिलासपुर पुलिस लाइन के चेतना हॉल में आयोजित कार्यक्रम में इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में संभाग आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे, जबकि रेंज के अन्य जिलों—कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, जीपीएम, सारंगढ़ और सक्ती—के पुलिस अधीक्षक वर्चुअली जुड़े।

इस फीडबैक सिस्टम की खास बात यह है कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक सरल गूगल फॉर्म खुलता है, जिसमें नागरिक प्रश्नोत्तर के माध्यम से थाना स्तर पर मिले अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। फॉर्म सबमिट होते ही यह जानकारी सीधे पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में दर्ज हो जाती है। पहचान और मोबाइल नंबर साझा करना पूरी तरह वैकल्पिक रखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि पुलिस को तकनीकी रूप से अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। आमजन के अनुभव ही यह तय करेंगे कि व्यवस्था कहां ठीक है और कहां सुधार की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से रेंज के सभी आठ जिलों के प्रत्येक थाने में क्यूआर कोड लगाए गए हैं।

जिला कलेक्टर ने इस पहल को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए वरिष्ठ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

संभाग आयुक्त ने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं का मूल्यांकन वही कर सकता है जो उनसे सीधे जुड़ा हो। ऐसे में पुलिस व्यवस्था का आकलन भी जनता के अनुभवों के आधार पर ही होना चाहिए।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर ने बताया कि जिले के सभी थानों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है और प्राप्त फीडबैक के आधार पर थानों की कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

कार्यक्रम में रायगढ़, मुंगेली और कोरबा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और इसे पुलिसिंग को व्यवहारिक स्तर पर बेहतर बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि रियल टाइम फीडबैक से समस्याओं की पहचान जल्दी होगी और समाधान भी समय पर संभव होगा।

कार्यक्रम के दौरान ‘अनुभव’ प्रणाली से जुड़ा एक वीडियो प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें इसके उपयोग और प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि और प्रिंट व सोशल मीडिया से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

बिलासपुर रेंज में यह व्यवस्था आज से सभी जिलों के सभी थानों में लागू कर दी गई है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस व्यवस्था का जिम्मेदारी से उपयोग करें—अच्छे अनुभवों को साझा करें और कमियों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज करें, ताकि व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव हो सके।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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