जशपुरनगर/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू एवं कृषि मंत्री  रामविचार नेताम भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना जशपुर जिले के लिए सिर्फ एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि हर बूंद से अधिक उत्पादन की सोच का प्रतीक है।

ये खबर भी पढ़ें…
सूरजपुर के दो शिक्षकों को मिलेगा राज्यपाल पुरस्कार
सूरजपुर के दो शिक्षकों को मिलेगा राज्यपाल पुरस्कार
सूरजपुर/शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को रायपुर स्थित राजभवन में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इसके सफल क्रियान्वयन से जशपुर देश के लिए आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का मॉडल जिला बनेगा। परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके तहत जमीन के अंदर पाइप बिछेगी, जिससे जमीन अधिग्रहण की भी समस्या नहीं होगी।

पहले सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता था। अब इस योजना से पानी की कमी दूर होगी। साथ ही किसानों को पर्याप्त पानी भी मिलेगा। यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है।

ये खबर भी पढ़ें…
हाईकोर्ट का फैसला: बिना सहमति म्यूचुअल ट्रांसफर के नाम पर शिक्षिका का तबादला, कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
हाईकोर्ट का फैसला: बिना सहमति म्यूचुअल ट्रांसफर के नाम पर शिक्षिका का तबादला, कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका के तबादला आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

देश में 23 राज्यों में 34 योजना स्वीकृत किए गए है। इसमें प्रदेश का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षक दिवस की तारीफ और शिक्षक की वास्तविक स्थिति के बीच  अंतर क्यों है..?
शिक्षक दिवस की तारीफ और शिक्षक की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर क्यों है..?
रायपुर (मनीष जायसवाल) ।5 सितंबर आते ही शिक्षक अचानक बहुत खास हो जाता है। शिक्षक दिवस पर उसके सम्मान में...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

योजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 ग्रामों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस दौरान रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, आईजी श्री दीपक झा, एसएसपी  लाल उमेद सिंह, डीएफओ श्री शशि कुमार, एडीएम श्री प्रदीप साहू, समृद्धि के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री आलोक अग्रवाल, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी कर्मचारी सहित ग्रामीणजन मौजूद रहे।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने क्षेत्रवासियों को सिंचाई कार्य शुभारम्भ की बधाई दी। उन्होंने कहा कि सिंचाई योजना से गांवों का सर्वांगीण विकास होगा। खेतों में जल की समुचित आपूर्ति होगी। जिससे किसान अधिक समृद्ध और खुशहाल होंगे। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि बगिया क्लस्टर सिंचाई योजना आने वाले समय में किसानों के लिए वरदान साबित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक विकसित होंगी

समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री आलोक अग्रवाल ने बताया कि एमकैड कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में किया गया था।

एमकैड कार्यक्रम के अंतर्गत कांसाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया एवं आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बगिया दाबित सिंचाई प्रणाली की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कार्य 6 माह में पूर्ण किया जाएगा। बगिया समृद्धि योजना का संचालन एवं संधारण जल उपभोक्ता समिति के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने के पश्चात प्रारंभिक 5 वर्षों तक संचालन एवं संधारण कार्य ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, इसके बाद यह जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी। समिति में महिलाओं की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। परियोजना में विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही जल के नियंत्रित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई परिसंपत्तियों पाइप नेटवर्क संरचना एवं जल प्रबंधन के संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डेटा एवं विश्लेषण के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कहां, कब और कितना पानी देना है।

बेहतर सिंचाई व्यवस्था के साथ उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित होगा।