Cm helpline।बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सेजेस (PM Shri SEGES) शहीद अविनाश शर्मा कन्या शाला से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी स्कूल में कक्षा 11वीं में प्रवेश (Admission) पाने के लिए भटक रही एक होनहार छात्रा और उसके परिजनों की आपबीती ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, बल्कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) के शिकायत निवारण दावे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अन्य खबरों के लिए ग्रुप से जुड़े यहां plz क्लिक करें 

पीड़ित छात्रा नैनी रजक कक्षा सातवीं से इसी शहीद अविनाश शर्मा कन्या शाला में अध्ययनरत थी। कक्षा 10वीं की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बाद उसने बायो/विज्ञान विषय लेकर 11वीं की पढ़ाई इसी स्कूल में जारी रखने की इच्छा जताई।

परिजनों का आरोप है कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश देने में आनाकानी की। छात्रा को उसकी पसंद का विषय देने से मना कर दिया गया।

विरोध करने और प्राचार्य के रवैये की शिकायत करने पर छात्रा को परेशान किया गया। परेशान होकर कई अन्य छात्राएं भी स्कूल से टीसी (Transfer Certificate) लेकर दूसरे स्कूलों में जाने को मजबूर हो रही हैं।

CM हेल्पलाइन में शिकायत: DEO के मौखिक निर्देश भी बेअसर?

स्कूल स्तर पर न्याय न मिलने पर परिजनों ने 30 जून 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में लेवल-वन अधिकारी व तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामेश्वर जायसवाल ने संज्ञान लिया। उन्होंने प्राचार्य से संपर्क कर छात्रा को प्रवेश देने के मौखिक निर्देश दिए। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों के बावजूद स्कूल स्तर पर प्रवेश क्यों नहीं दिया गया? क्या स्कूल प्रबंधन पर जिला शिक्षा अधिकारी के आदेशों का कोई असर नहीं था?

सबक सिखाने के लिए कटवाए चक्कर, अंततः प्राइवेट स्कूल में दाखिला

परिजनों का गंभीर आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद समस्या हल करने के बजाय उन्हें “सबक सिखाने” की नीयत से बार-बार स्कूल बुलाकर चक्कर कटवाए गए। अंततः बच्ची का भविष्य खराब न हो, इसलिए मजबूरी में परिजनों को उत्कृष्ट (PM Shri SEGES) सरकारी स्कूल छोड़कर एक निजी (Private) स्कूल में दाखिला दिलाना पड़ा।

कागजों में बंद कर दी गई शिकायत!

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के रिकॉर्ड के अनुसार, 5 जुलाई 2026 को इस शिकायत का “निराकरण” दर्ज कर दिया गया। हालांकि, पोर्टल पर शिकायतकर्ता की संतुष्टि या असंतुष्टि की पुष्टि लंबित दर्शायी गई है।

जब छात्रा को स्कूल में प्रवेश मिला ही नहीं और उसे प्राइवेट स्कूल जाना पड़ा, तो शिकायत का निराकरण किस आधार पर दर्ज किया गया?क्या बिना पीड़ित की संतुष्टि के केवल पोर्टल का आंकड़ा सुधारने के लिए शिकायत बंद (Close) कर दी गई?

सरकारी उत्कृष्ट विद्यालयों (PM Shri SEGES) से मोहभंग होकर छात्र प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं, तो इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?