सिर्फ कानून नहीं, चेतना से बदलाव: बिलासपुर ने दिखाई नई राह
जब पुलिस और समाज साथ आए: ‘चेतना’ ने बिलासपुर को दी नई दिशा

बिलासपुर… पुलिस लाइन स्थित चेतना भवन में अंतर्राष्ट्रीय चेतना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह ने बिलासपुर में पुलिस और समाज के बीच मजबूत होते भरोसे को नई पहचान दी। बिलासपुर पुलिस, NHICF और विभिन्न नागरिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम ने “चेतना” को जनभागीदारी के प्रभावी अभियान के रूप में स्थापित किया।
मंच पर पुलिस कप्तान रजनेश सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी और डॉ. विनय कुमार पाठक (कुलपति) की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट आयाम दिया, जबकि अन्य अतिथियों में पं. संजय दुबे, अजित मिश्रा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के केंद्र में बिलासपुर पुलिस द्वारा संचालित “चेतना अभियान” के आठ प्रमुख आयाम रहे, जिन पर विस्तृत चर्चा हुई। सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण और अपराध नियंत्रण में जनभागीदारी की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
SSP रजनेश सिंह ने स्पष्ट कहा—“समाज में स्थायी बदलाव केवल पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि जनता की सक्रिय भागीदारी से ही यह अभियान सफल होगा।”
न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि जागरूक नागरिक ही मजबूत कानून व्यवस्था की नींव होते हैं। वहीं डॉ. विनय कुमार पाठक ने “चेतना” को वर्तमान समय की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता बताते हुए इसे पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।
आयोजन के प्रमुख समन्वयक के रूप में पंकज खंडेलवाल की सक्रिय भूमिका और समर्पित नेतृत्व खास तौर पर उभरकर सामने आया, जिनके प्रयासों ने इस आयोजन को प्रभावी दिशा और व्यापक स्वरूप दिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों, समाजसेवियों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में मास्टर तनिष्क और मयंशी खंडेलवाल की प्रस्तुति ने आयोजन को जीवंत और भावनात्मक स्पर्श दिया।
बड़ी संख्या में सामाजिक, साहित्यिक और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि बिलासपुर में अब सामाजिक जिम्मेदारी साझा सरोकार बन चुकी है।
समापन में संदेश स्पष्ट रहा—“चेतना” अब एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को भीतर से बदलने की सतत प्रक्रिया है, जिसमें पुलिस, संगठन और नागरिक मिलकर नई दिशा तय कर रहे हैं।





