CG News: बेटे की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और तबादला नीति के उल्लंघन का हवाला देते हुए सब इंजीनियर देवव्रत रामटेके को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है।

जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत 1 अक्टूबर 2026 को जारी तबादला आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने तबादला समिति को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश भी दिया है।

देवव्रत रामटेके कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की परियोजना क्रियान्वयन इकाई-02 में उप अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

विभागीय आदेश के तहत उनका तबादला भानुप्रतापपुर से बीजापुर कर दिया गया था। इस आदेश को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

याचिका में दलील दी गई कि पिछली पदस्थापना के दो वर्ष के भीतर दोबारा तबादला किया गया है, जो 5 जून 2025 की तबादला नीति के खंड 1.11 और 3.10 के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि देवव्रत रामटेके के बेटे को डाउन सिंड्रोम है और उसके हृदय का ऑपरेशन भी हो चुका है। बच्चे को नियमित उपचार की आवश्यकता है, जो बीजापुर में उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि उनके खिलाफ न तो कोई शिकायत है और न ही कोई विभागीय जांच लंबित है। ऐसे में तबादले के औचित्य पर सवाल उठाते हुए आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अंतरिम राहत के आवेदन पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने देवव्रत रामटेके के तबादला आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।

साथ ही तबादला समिति को उनके अभ्यावेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

फिलहाल यह अंतरिम राहत है। कोर्ट ने तबादले को लेकर अंतिम निर्णय नहीं दिया है, बल्कि अगली सुनवाई तक आदेश पर रोक लगाते हुए अभ्यावेदन पर तय समय में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।