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CG News-कोण्डागांव बालगृह कर्मियों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

ज्ञापन सौंपने पहुंचे कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वे लंबे समय से अनाथ, निराश्रित और देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर रहे हैं।

CG News-कोण्डागांव। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत एनजीओ के माध्यम से संचालित बालगृह में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के सामने अब आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अपनी सेवाओं को यथावत बनाए रखने और भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर सोमवार को इन कर्मचारियों ने लामबंद होकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को रखते हुए कर्मचारियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और उनके अनुभव को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वे लंबे समय से अनाथ, निराश्रित और देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर रहे हैं।

कर्मचारियों ने उन कठिन दिनों को याद किया जब कोरोना महामारी के दौरान पूरा देश घरों में कैद था, उस समय इन कर्मचारियों ने अपने परिवारों की चिंता छोड़कर बालगृह में ही डेरा डाला था। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली और बच्चों को अकेलेपन का अहसास नहीं होने दिया।

कर्मचारियों के समर्पण का ही सुखद परिणाम है कि आज कोण्डागांव बालिकागृह की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है। यहाँ की प्रतिभावान बालिकाएं न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, बल्कि लगातार दो वर्षों से इस बालगृह की बालिकाओं ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया है।

कर्मचारियों का कहना है कि इन उपलब्धियों के पीछे उनकी वर्षों की मेहनत और बच्चों के साथ विकसित हुआ भावनात्मक जुड़ाव है।

अब इन अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों को आशंका है कि उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। उन्होंने कलेक्टर को बताया कि यदि ऐसा होता है, तो न केवल उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होगा, बल्कि बालगृह में रह रहे बच्चों की देखभाल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

नए और अनुभवहीन कर्मचारियों के आने से बच्चों की दिनचर्या और उनकी मानसिक देखरेख की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उनके त्याग, अनुभव और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें सेवा में निरंतर रखा जाए

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