CG NEWS:पानी समस्या की जड़ पर कांग्रेस का प्रहार… कोलवॉशरी मुद्दे पर बड़ी मुहिम..!

CG NEWS:( गिरिजेय ) छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान तब के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रेल्वे और छत्तीसगढ़ शासन के आला अफसरों की एक मीटिंग में सवाल किया था …। उन्होने पूछा था कि प्रदेश में बन रहे रेल कॉरिडोर से यहां के आम लोगों को क्या फायदा होने वाला है…? शायद उनका इशारा इस ओर रहा होगा कि इस कॉरिडोर से छत्तीसगढ़ के खनिज और दूसरे संसाधनों का दोहन करने वालों को फायदा पहुंचेगा। लेकिन आम आदमी को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है…। पता नहीं उन्हे इस सवाल का जवाब मिला या नहीं…। लेकिन बिलासपुर के लोग उम्मीद ज़रूर कर रहे थे कि भूपेश बघेल कभी बिलासपुर के अफसरों से मीटिंग कर कभी यह पूछेंगे कि इस शहर के चारों तरफ लगे कोलवॉशरी से यहां के आम लोगों को क्या फायदा हे रहा है…? हालांकि यह सवाल उनकी ओर से कभी नहीं आया । लेकिन उनकी ही पार्टी कांग्रेस ने देर से ही सही कोलवॉशरी को लेकर बड़ी मुहिम शुरू कर दी है। दरअसल बिलासपुर और आसपास हो रही पानी की समस्या की जड़ यही है । जिसे उजागर करते हुए जड़ पर प्रहार करने का बीड़ा कांग्रेस ने उठाया है। लगता है कि अगर पार्टी कोलवॉशरी का काला सच आम लोगों को समझाने में कामयाब रही तो बिलासपुर के पिछले जनआंदोलनों की तरह यह मुहिम भी किसी नतीजे तक पहुंच सकेगी।
लोगों को सिर्फ याद दिलाने के लिए यह लिखना पड़ रहा है कि भीतर – भीतर बहने वाली अरपा नदी बिलासपुर की पहचान है। इससे जुड़ी एक पहचान यह भी है कि कुदरत ने इस शहर को जमीन के नीचे भरपूर पानी दिया है। लोग अभी भी नहीं भूले हैं कि यहां हर घर में कुआं होता था । समय गुज़रा तो चार मजदूर दिन भर में गिरमिट से खोदकर शाम को हैंडपंप लगाकर चले जाते थे। पानी के मामले में खुशहाल इस शहर में लोग रिटायरमेंट के बाद बसना चाहते थे । लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और बिलासपुर में भी पानी का संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन भी इसकी चिंता कर रहा है। ऐसे समय में लोगों को पानी बचाने की समझाइस दी जाती है। पानी की बर्बादी को रोकना भी चाहिए । ज़िम्मेदार तो उन किसानों को भी ठहराया जाता है, जो गरमी में धान की फ़सल लेते हैं। इसके लिए फसल चक्र में बदलाव होना चाहिए। लेकिन पानी की बर्बादी कर रहे कोलवॉशरी की ओर नज़र किसी की नहीं जाती।
शहर के चारों तरफ मस्तूरी,बेलतरा,बिल्हा,तखतपुर,कोटा सहित बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के इलाके में कोई भी घूमकर देख सकता है कि पिछले कुछ बरसों के भीतर यहां किस कदर धड़ल्ले से कोलवॉशरी लगी है। बिलासपुर के आसपास जमीन के नीचे कोयले का भंडार नहीं है। इसलिए कोयले की खदान नहीं है। लेकिन किसी की आँख में पट्टी बांधकर अगर किसी कोलवॉशरी के पास पहुंचने के बाद पट्टी खोल दी जाए तो उसे लगेगा कि वह कोयला खदान के एरिया में है। बिलासपुर शहर का भूगोल बदल देने वाले कोलवॉशरी में कोयला धोने का काम होता है। कोयले जैसी चीज को धोने में कितना पानी लगता होगा , इसका अदाजा लगाया जा सकता है। जाहिर सी बात है कि जमीन का सीना छलनी कर यह पानी निकाला जाता है। यह पूछा जा सकता है कि कोलवॉशरी से बिलासपुर के आम लोगों को क्या मिल रहा है..? जिनके हिस्से के पानी पर डाका डालकर कोयला धोने का काम चल रहा है। प्रशासन में बैठे लोगों को ज़रूर पता होगा कि एक – एक कोलवॉशरी में कितने इंच की बोरिंग की गई है … और कितने हॉर्सपावर के मोटर पानी खींच रहे हैं। गरमी की फसल लेने वाले किसान तो फिर भी अनाज पैदा करते हैं और इससे कई परिवारों को रोजी मिलती है। लेकिन कोलवॉशरी में क्या पैदा हो रहा है…? बल्कि भूजल के भरोसे अच्छे किस्म की सब्जी – भाजी पैदा करने वाले बिलासपुर शहर के आसपास के इलाके में इस काले कारोबार की वजह से जमीन बंजर हो रही है। कभी हरियाली से भरे इस इलाके में अब चारों ओर काली हवा का धुंध छाया रहता है और पत्तियां भी कोयले की डस्ट से काली पड़ गईं हैं। शहर की पहचान को मिटाकर पानी का संकट खड़ा करने वाले इस कारोबार को लेकर पिछले बरसों में कोई सवाल खड़ा नहीं किया गया । शायद लोग इस बात का अहसास नहीं कर पाए कि कुदरत से मिले पानी के तोहफे की लूट मचाकर यह संकट खड़ा किया जा रहा है। जो आने वाले समय में शहर को भयानक स्थिति की ओर ले जाएगा। कई बार लगता है कि कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में उस समय के विधायक शैलेश पाण्डेय की पहल पर अरपा में शुरू किया गया बैराज भी इस शहर को संकट से उबार नहीं पाएगा। यह सौगात भी कोयला धोने के काम आएगी और बची – खुची जगह पर नई कोलवॉशरी खड़ी होकर शहर के लोगों के हिस्से का पानी छीन ले जाएगी।
इस समय सत्ता पर काबिज नुमाइंदों और निजाम का रुख इस मुद्दे पर क्या है..? यह तो सबके सामने है। लेकिन कांग्रेस ने देर से ही सही सड़क पर उतरकर मुहिम शुरू की है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी कहते हैं कि उन्होने बिलासपुर के आसपास सर्वे कराया है । यहां छोटे – बड़े 19 कोलवॉशरी हैं और करीब पांच दर्जन वैध – अवैध कोयला प्लॉट हैं। जहां पर रोज़ाना हजारों टन कोयला आता है और धुलाई के लिए बेहिसाब पानी का इस्तेमाल हो रहा है। प्रशासन को बताना चाहिए कि कोयला धोने के लिए कितने इंच बोरिंग और कितने हॉर्सपावर के पंप लगाने की परमीशन दी गई है। इस मामले में जल संसाधन विभाग, पीएचई और खनिज विभाग जिम्मेदार हैं। एक तरफ किसानों को पंप के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा है और दूसरी तरफ कोयले के लिए सभी तरह की सुविधा है। विजय केशरवानी ने आगे कहा कि कांग्रेस इसे आम जनता की मुहिम बनाएगी। 14 मई को पानी की समस्या को लेकर बिलासपुर नगर निगम के घेराव में यह प्रमुख मुद्दा है। सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की ओर से भी इस मुद्दे पर धरना – प्रदर्शन किया जा रहा है।
भीषण गरमी के दौरान जब पारा 40 डिग्री से ऊपर जा रहा है, कांग्रेस एक ज़मीनी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर रही है। कांग्रेस बिलासपुर शहर के वर्तमान और भविष्य से जुड़े इस मुद्दे के साथ आम लोगों को किस हद तक जोड़ पाती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन अगर वह इसकी हकीकत समझाने में कामयाब रही तो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर यह मुद्दा भी पहले के जनआंदोलनों की तरह एक बड़ी मुहिम में तब्दील हो सकता है।




