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CG Congress-कांग्रेस में नियुक्तियों पर रार: रिश्वत के मामले में सजायाफ्ता पूर्व पटवारी को बनाया प्रवक्ता, जिलाध्यक्ष के फैसलों से भड़के दिग्गज नेता

प्रवक्ता नियुक्त हुए खान पर उपरोक्त मामलों को संगठन से छुपाने का आरोप भी है। इस बीच जिले के कई प्रमुख नेता सांगठनिक नियुक्ति को सिरे से निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष विपिन यादव ने सिर्फ तीन लोगों को नियुक्त किया है। जबकि समूचे जिले की कार्यकारिणी का अब तक अता-पता नहीं है।

CG Congress/राजनांदगांव /राजनांदगांव जिला ग्रामीण कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उठा विवाद अब प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है। जिलाध्यक्ष विपिन यादव द्वारा की गई नई नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर असंतोष की ज्वाला भड़का दी है, जिससे संगठन के वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय विधायकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

विवाद की मुख्य जड़ प्रवक्ता के पद पर अनीस खान की नियुक्ति को माना जा रहा है, जिसे लेकर पार्टी के भीतर ही कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अनीस खान की नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ताओं में इसलिए अधिक रोष है क्योंकि उनकी पृष्ठभूमि कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से कभी जुड़ी नहीं रही है। गंभीर आरोप यह है कि पटवारी के पद पर कार्य करने के दौरान उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था, जिसके बाद उन्हें अदालत से सजा भी मिली थी।

आरोप लगाया जा रहा है कि खान ने इस आपराधिक रिकॉर्ड और सजा की जानकारी संगठन से छिपाई। ऐसे में एक सजायाफ्ता व्यक्ति को पार्टी का मुख्य चेहरा और प्रवक्ता बनाए जाने के फैसले को वरिष्ठ नेता न्यायोचित नहीं मान रहे हैं और इसे पार्टी की छवि खराब करने वाला कदम बता रहे हैं।

विवाद केवल प्रवक्ता के पद तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन महामंत्री की नियुक्ति ने भी आग में घी डालने का काम किया है। जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने अपने गृह क्षेत्र छुरिया के करीबी राहुल तिवारी को संगठन महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि इस पद के लिए पंकज बांधव प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।

पंकज बांधव को दरकिनार कर उन्हें केवल महामंत्री बनाया गया, जिससे उनके समर्थकों में भी गुस्सा है। हैरानी की बात यह है कि जिलाध्यक्ष ने अब तक केवल तीन ही नियुक्तियां की हैं, जबकि पूरे जिले की कार्यकारिणी का गठन लंबे समय से अधर में लटका हुआ है।

जिलाध्यक्ष विपिन यादव की कार्यशैली को लेकर स्थानीय विधायकों के साथ भी उनके टकराव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधायक संगठन के कामकाज के तरीकों से नाखुश हैं। वहीं, राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुखर रहने के निर्देशों के बावजूद जिले में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है।

आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने मनरेगा के अस्तित्व को बचाने जैसे जमीनी मुद्दों पर कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करने में रुचि नहीं दिखाई है। इन तमाम विवादों और सांगठनिक असंतुलन के कारण कई बड़े नेताओं ने अघोषित रूप से जिलाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और नियुक्तियों को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के पास शिकायतें पहुंचनी शुरू हो गई हैं।

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