रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र का मामला, असहनीय दर्द से कराह रहे कार्यकर्ता और जनता

रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी) । आम तौर पर किसी दल के कार्यकर्ताओं की भूमिका चुनाव के समय काफी महत्वपूर्ण होती है। असम,बंगाल जैसे राज्यों में इस समय कार्यकर्ताओं की असल भूमिका खुली आंखों से देखी जा सकती है। यही कार्यकर्ता हैं जो पार्टी का झंडा बुलंद करने का काम करते हैं। विपक्ष में रहते हुए इन्हीं कार्यकर्ताओं को डंडा भी खाना पड़ता है। लेकिन जब इन कार्यकर्ताओं के दल की सरकार होती है तो बहुत से कार्यकर्ताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। दर्द से कराह रहे इन कार्यकर्ताओं को मलहम लगाने वाला कोई नहीं होता,दरअसल सत्ता का चरित्र ही कुछ ऐसा होता है। नतीजन कुर्सी में विराजमान कुछ सरकारी मुलाजिम इन्हें रौंदने का काम करने लगते हैं।
सरकारी मुलाजिम भ्रष्टाचार के दम पर यंत्री से लेकर संत्री तक अपनी वकत बना लेते हैं और इन्हें पल-पल बेइज्जत करना शुरु कर दिया जाता है। खैर ताजा मामला सरगुजा संभाग के एक सीएमओ के ऑडियो से जुड़ा हुआ है,जो ऑडियो में कार्यकर्ताओं को लेकर अशोभनीय और भद्दी बातें करते सुनाई दे रहे हैं। उनकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी,वह अशोभनीय बातों को रिकार्ड कर सुना देने की भी बात कह रहे हैं। निश्चित तौर पर उन्हें किसी राजनेता का संरक्षण होगा,वरना कोई भी प्रशासनिक अफसर ऐसे आचरण से परहेज करता है। फिलहाल ऑडियो की सत्यता जांच का विषय है। लेकिन वास्तव में अगर यह ऑडियो सत्य है,तो यहां अफसरों की अराजकता और निरंकुशता को लेकर डॉ. रमन सिंह के आखिरी कार्यकाल और भूपेश बघेल के बीते कार्यकाल को स्मरण कर लेना चाहिए।





