कप्तान का ‘नो मर्सी मोड’:ओडिशा से एमपी तक गांजा तस्करी पर ब्रेक..3 गिरफ्तार, भारी मात्रा गांजा भी जब्त
नशे के नेटवर्क पर बिलासपुर पुलिस का डबल अटैक, SSP की सख्ती से तस्करों में हड़कंप

बिलासपुर…जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस कप्तान रजनेश सिंह की सख्त नीति अब खुलकर सामने आने लगी है। लगातार मिल रही सूचनाओं और बढ़ती तस्करी पर ब्रेक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बिलासपुर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर दो बड़ी कार्रवाइयाँ करते हुए अंतर्राज्यीय तस्करों और स्थानीय सप्लायर—दोनों को दबोच लिया। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने करीब 17 किलो गांजा, मोबाइल फोन और नकदी जब्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
तोरवा पुलिस की कार्रवाई
पहली कार्रवाई तोरवा थाना और साइबर टास्क टीम की संयुक्त टीम ने की। 15 जनवरी को हेमूनगर ओवरब्रिज के पास मैदान में संदिग्ध हालत में खड़े दो युवकों पर पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस वाहन देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उनके बैग से खाकी टेप में लिपटा कुल 11.80 किलो गांजा बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब 1 लाख 32 हजार रुपये आंकी गई है। आरोपियों की पहचान पेण्ड्रारोड निवासी बहादुर सिंह राठौर और मध्यप्रदेश के कटनी जिले के रहने वाले इंद्रजीत कुरील के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि गांजा ओडिशा से लाकर मध्यप्रदेश ले जाया जा रहा था। पुलिस ने दोनों के पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं और एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है।
बेलगहना चौकी पुलिस की कार्रवाई
दूसरी बड़ी कार्रवाई कोटा थाना अंतर्गत बेलगहना चौकी क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस ने स्थानीय स्तर पर चल रहे गांजा कारोबार पर सीधा प्रहार किया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने फॉरेस्ट कॉलोनी बेलगहना में दबिश दी और दादा मिंया नामक व्यक्ति के घर से पांच किलो गांजा बरामद किया। मौके से गांजा बिक्री की रकम 1300 रुपये भी जब्त की गई। जब्त मशरूका की कुल कीमत लगभग 2 लाख 51 हजार रुपये बताई जा रही है। आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने गांजा ग्राम बेलगहना के लक्ष्मण यादव से खरीदा था। पुलिस अब फरार सप्लायर की तलाश में जुट गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इन दोनों मामलों में कप्तान रजनेश सिंह के स्पष्ट निर्देश पर एंड-टू-एंड विवेचना की जा रही है, ताकि तस्करी की पूरी सप्लाई चेन, संपर्क सूत्र और नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। पुलिस की रणनीति केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के कारोबार की जड़ तक पहुंचकर उसे पूरी तरह खत्म करना है।
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