BUDGET 2026 LIVE: वित्त मंत्री पेश कर रही हैं आम बजट

BUDGET 2026 LIVE/नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर रही हैं।नीचे आप इसका सीधा प्रसारण देख सकते है.केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। यह एक परंपरा है, जिसमें हर साल वित्त मंत्री बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति से मिलती हैं। इस दौरान राष्ट्रपति ने निर्मला सीतारमण को दही-चीनी भी खिलाई और उन्हें व उनकी टीम को बजट पेश करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर भी इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें शेयर की गई हैं। इसके साथ ही लिखा है, “केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और वित्त मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों के साथ यूनियन बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम को बजट पेश करने के लिए शुभकामनाएं दीं।”
इसके पहले सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने मंत्रालय पहुंची थीं और बजट से जुड़ी अंतिम तैयारियों की समीक्षा की। हर साल की तरह इस बार भी उनका हाथ में ‘बहिखाता’ देखा गया, उसी टैब में वह पेपरलेस बजट प्रस्तुत करती रही हैं।BUDGET 2026 LIVE
इस बार का बजट खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह लगातार उनका नौवां बजट है। इस उपलब्धि के साथ वह उन चुनिंदा वित्त मंत्रियों में शामिल हो गई हैं जिन्होंने सबसे अधिक बार बजट पेश किया है।
इस बजट से लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। किसानों, छात्रों और मध्यम वर्ग के लिए नई घोषणाओं की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, आर्थिक सर्वेक्षण के संकेतों से पता चला है कि इस बार के बजट में सरकार रोजगार, विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर सकती है। साथ ही कुछ चुनावी राज्यों के लिए बड़े ऐलान भी किए जा सकते हैं, जिससे राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से बजट की अहमियत बढ़ गई है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन से चलने वाली रिफॉर्म एक्सप्रेस का डेस्टिनेशन बताया।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “रिफॉर्म एक्सप्रेस बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ी है। संसद में बजट पेश होने के साथ आज हम इसकी एक झलक देखेंगे। यह बजट पूरे देश के लिए है। यह सभी की भलाई के लिए है।”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा, “यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का बजट है।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से रविवार को संसद में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करना भी एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार इसे रविवार को पेश किया जा रहा है।
यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट है, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह 15वां बजट है। यह 2024 में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए एनडीए के सत्ता में लौटने के बाद दूसरा पूर्ण बजट भी है।
अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि इस साल का बजट रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, पूंजीगत व्यय, बिजली और किफायती आवास पर केंद्रित होगा, जबकि सामाजिक कल्याण प्राथमिकताओं और वित्तीय समझदारी के बीच सावधानी से संतुलन बनाए रखेगा। उनका कहना है कि जोर वित्तीय मजबूती से समझौता किए बिना विकास की गति को बनाए रखने पर होगा।
बजट पेश करने से पहले निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। यह एक परंपरा है, जिसमें हर साल वित्त मंत्री बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति से मिलती हैं। इस दौरान राष्ट्रपति ने निर्मला सीतारमण को दही-चीनी भी खिलाई और उन्हें व उनकी टीम को बजट पेश करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
रविवार सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने मंत्रालय पहुंची थीं और बजट से जुड़ी अंतिम तैयारियों की समीक्षा की। हर साल की तरह इस बार भी उनके हाथ में ‘बहिखाता’ देखा गया, उसी टैब में वह पेपरलेस बजट प्रस्तुत करती रही हैं।
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने इस बजट को लेकर आम जनता के लिए खास राहत की उम्मीद कम जताई है और सरकार पर लोगों की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने आईएएनएस से कहा कि अगर हर साल की तरह इस बार भी जनता को सिर्फ आंकड़ों के जाल में उलझाया गया, तो यह बजट एक बार फिर असफल साबित होगा। उन्होंने कहा, “देश की स्थिति अब बदल चुकी है और लोगों को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव चाहिए।”
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आज भी आम आदमी के लिए बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई बीमार हो जाए, खासकर बिहार जैसे राज्यों में, तो सरकारी अस्पतालों में ठीक से इलाज नहीं मिल पाता। बच्चों को सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही है। किसान और नौजवानों की हालत आज भी जस की तस है। ऐसे में बजट से क्या बदलने वाला है?
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने भी बजट को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है और आम जनता के लिए इसमें कुछ भी खास नजर नहीं आता। आम लोगों के लिए कुछ नहीं है।
वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बजट को लेकर अधिक उम्मीदें नहीं जताईं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बार के बजट से बहुत ज्यादा आशा नहीं है।
एक ओर विपक्ष बजट 2026 को लेकर सरकार के दावों से संतुष्ट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर पक्ष के नेताओं ने इस बार के केंद्रीय आम बजट को हर एक वर्ग के लिए बेहद खास बताया है। इसके साथ ही इस बजट को विकसित भारत की दिशा में अग्रणी कदम भी बताया है।
भारत के इतिहास में पहली बार देश का आम बजट रविवार के दिन पेश हो रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद के चल रहे बजट सत्र के हिस्से के रूप में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं।
सरकार अपने बजट और आर्थिक नीतियों के माध्यम से 2047 तक देश को विकसित बनाने के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में यह देश की जनता के लिए बड़ी घोषणाओं के साथ ‘विकसित भारत’ के सपनों को साकार करने वाला बजट हो सकता है। हालांकि, बजट के साथ कुछ परंपराएं और नए रिकॉर्ड भाजपा सरकार में बने हैं, उसका उदाहरण इस बार भी देखा जा सकता है।
इस साल 1 फरवरी को रविवार पड़ने के बावजूद केंद्रीय बजट तय कार्यक्रम के अनुसार संसद में पेश किया जाएगा। बजट के महत्व को देखते हुए मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, जो आमतौर पर रविवार को बंद रहते हैं, वे भी आज खुले रहेंगे।
खास बात यह है कि वित्त मंत्री सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करके इतिहास रचेंगी, जो भारत के संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि है। एक रिकॉर्ड यह भी है कि यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का 15वां बजट है। साल 2024 में एनडीए की तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट भी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 75 साल पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए अपने बजट भाषण के भाग-बी का उपयोग कर सकती हैं। परंपरागत रूप से मुख्य घोषणाएं और व्यापक आर्थिक विवरण भाग-ए में पेश किए जाते रहे हैं, जबकि भाग-बी मुख्य रूप से कर प्रस्तावों और नीतिगत परिवर्तनों पर केंद्रित रहा है। हालांकि इस बार संभावनाएं हैं कि भाग-बी केंद्र में रहेगा।
भाजपा सरकार ने बजट को लेकर जिन परंपराओं को बदला है, उसमें बजट का समय और तारीख भी शामिल है।
आजादी के पहले और आजादी के बाद भी परंपरागत रूप से बजट फरवरी के आखिरी दिन शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह समय एक औपनिवेशिक काल की प्रथा का पालन करता था, जब घोषणाएं लंदन और भारत में एक ही समय पर की जा सकती थीं। भारत ब्रिटिश टाइम से 4 घंटे और 30 मिनट आगे है। 1999 में समय बदल दिया गया, जब तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सुबह 11 बजे बजट पेश किया। तब से बजट सुबह 11 बजे पेश किए जाते हैं।
2017 में बजट पेश करने की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी गई, ताकि सरकार मार्च के अंत तक संसदीय अनुमोदन प्रक्रिया पूरी कर सके और 1 अप्रैल को वित्तीय वर्ष की शुरुआत से बजट को लागू किया जा सके। इससे पहले, बजट पेश करने की तारीख 28 फरवरी हुआ करती थी।




