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BUDGET 2026- ऐतिहासिक रविवार,पहली बार छुट्टी के दिन बजट, निर्मला सीतारमण का 9वां रिकॉर्ड और विकसित भारत का नया रोडमैप

इस बजट के साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दुर्लभ कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया है। वह लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन गई हैं। साथ ही, नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल का यह कुल 15वां बजट है, जो सरकार की आर्थिक निरंतरता और स्थिरता को दर्शाता है।

BUDGET 2026/भारत के संसदीय और आर्थिक इतिहास में आज का दिन यानी रविवार, एक नए और सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। देश के इतिहास में यह पहली बार है जब आम बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के बजट सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का लेखा-जोखा पेश कर रही हैं।

इस दिन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आमतौर पर रविवार को बंद रहने वाले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी आज विशेष तौर पर खुले हैं, ताकि बजट घोषणाओं पर बाजार अपनी प्रतिक्रिया दे सके। यह बजट महज एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

इस बजट के साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दुर्लभ कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया है। वह लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन गई हैं। साथ ही, नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल का यह कुल 15वां बजट है, जो सरकार की आर्थिक निरंतरता और स्थिरता को दर्शाता है।

2024 में एनडीए की तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट है, जिससे मध्यम वर्ग, किसानों और उद्योग जगत को भारी उम्मीदें हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार वित्त मंत्री 75 साल पुरानी परंपरा को बदलते हुए बजट के ‘भाग-बी’ (Part B) पर विशेष जोर दे सकती हैं।

जहां पहले भाग-बी सिर्फ कर प्रस्तावों तक सीमित रहता था, वहीं इस बार इसमें भविष्य के बड़े आर्थिक सुधारों और विकास की प्राथमिकताओं का विस्तृत रोडमैप देखने को मिल सकता है।

बीते कुछ वर्षों में भाजपा सरकार ने बजट से जुड़ी कई औपनिवेशिक कालीन परंपराओं को बदलने का साहस दिखाया है। एक समय था जब भारत का बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था ताकि लंदन के समय के साथ तालमेल बिठाया जा सके, लेकिन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था।

इसी तरह, 2017 में बजट पेश करने की तारीख को 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी किया गया, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से सभी योजनाएं सुचारू रूप से लागू हो सकें। आज रविवार को बजट पेश करने का निर्णय भी इसी प्रशासनिक चुस्ती और समय की बचत की कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान करेगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत की आर्थिक नींव को और मजबूत करेगा।

‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए इस बार रक्षा, बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े आवंटन की संभावना है। जिस तरह से बजट की तारीखों और प्रस्तुति के तरीकों में बदलाव कर इसे अधिक प्रभावी बनाया गया है, वह भारत की बदलती कार्यसंस्कृति का प्रतीक है।

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने इस बजट को लेकर आम जनता के लिए खास राहत की उम्मीद कम जताई है और सरकार पर लोगों की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।

समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने आईएएनएस से कहा कि अगर हर साल की तरह इस बार भी जनता को सिर्फ आंकड़ों के जाल में उलझाया गया, तो यह बजट एक बार फिर असफल साबित होगा। उन्होंने कहा, “देश की स्थिति अब बदल चुकी है और लोगों को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव चाहिए।”

सपा सांसद आनंद भदौरिया ने आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आज भी आम आदमी के लिए बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई बीमार हो जाए, खासकर बिहार जैसे राज्यों में, तो सरकारी अस्पतालों में ठीक से इलाज नहीं मिल पाता। बच्चों को सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही है। किसान और नौजवानों की हालत आज भी जस की तस है। ऐसे में बजट से क्या बदलने वाला है?

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने भी बजट को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है और आम जनता के लिए इसमें कुछ भी खास नजर नहीं आता। आम लोगों के लिए कुछ नहीं है।

वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बजट को लेकर अधिक उम्मीदें नहीं जताईं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बार के बजट से बहुत ज्यादा आशा नहीं है।

एक ओर विपक्ष बजट 2026 को लेकर सरकार के दावों से संतुष्ट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर पक्ष के नेताओं ने इस बार के केंद्रीय आम बजट को हर एक वर्ग के लिए बेहद खास बताया है। इसके साथ ही इस बजट को विकसित भारत की दिशा में अग्रणी कदम भी बताया है।

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