टीएल बैठक में बड़े फैसले: स्कूलों में मान्यता अनिवार्य, हर शनिवार शिविर—कलेक्टर का सख्त एक्शन मोड
कलेक्टर संजय अग्रवाल की टीएल बैठक में कड़ा संदेश: ‘पारदर्शिता दिखे ज़मीन पर, नहीं तो कार्रवाई तय

बिलासपुर ..जिला प्रशासन की साप्ताहिक टीएल बैठक इस बार सिर्फ समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि सिस्टम को साफ, जवाबदेह और भविष्य उन्मुख बनाने का स्पष्ट रोडमैप तय हुआ। मंथन सभा कक्ष में हुई बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने साफ कर दिया—काम दिखना चाहिए, और ऐसा दिखना चाहिए जिसमें पारदर्शिता भी हो और दूरदृष्टि भी।
बैठक का सबसे सख्त और सीधा संदेश शिक्षा व्यवस्था को लेकर रहा। कलेक्टर ने सभी निजी स्कूलों को अपने परिसर में मान्यता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। यह भी स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है या छत्तीसगढ़ बोर्ड से। उद्देश्य साफ है—अभिभावकों और विद्यार्थियों को भ्रम से बचाना और फर्जीवाड़े की हर गुंजाइश खत्म करना। जिला शिक्षा अधिकारी को इस व्यवस्था को तत्काल लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई।
जनता से सीधे संवाद और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक बड़ा निर्णय भी सामने आया। अब हर शनिवार तहसील स्तर पर जनसमस्या निवारण शिविर लगेगा। इन शिविरों में कलेक्टर खुद मौजूद रहेंगे। इसी माह से शुरू होकर करीब दो महीने तक यह अभियान चलेगा। साफ संकेत है—शिकायतें अब फाइलों में नहीं, मौके पर सुलझेंगी।
विकास कार्यों को लेकर कलेक्टर का रुख और भी स्पष्ट दिखा। बजट में शामिल योजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ कागजी योजना नहीं चलेगी, स्थल निरीक्षण अनिवार्य होगा। साथ ही योजनाएं ऐसी बनें जो आने वाले 20 से 30 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सकें। अधूरी सोच या जल्दबाजी में बनाए गए प्रस्तावों के लिए अब जगह नहीं है।
कलेक्टर ने एक अहम व्यावहारिक पहलू पर भी ध्यान दिलाया—किसी भी सरकारी भवन या आवास का निर्माण तब तक नहीं हो, जब तक वहां तक पहुंचने के लिए सड़क उपलब्ध न हो। स्पष्ट संदेश—बुनियादी सुविधा के बिना निर्माण, संसाधनों की बर्बादी है।
जल संरक्षण को लेकर भी बैठक में ठोस दिशा तय हुई। सूखे तालाबों की खुदाई कर उनकी गहराई बढ़ाने के लिए वहीं से मिट्टी और मुरूम निकालने के निर्देश दिए गए, ताकि जल संचयन की क्षमता बढ़े। इसके साथ ही अनियमित उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। ग्रामीण इलाकों में सोखता गड्ढे, कच्चे नाला बांध और वर्षा जल रोकने के उपायों को प्राथमिकता देने को कहा गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसे बड़े अभियानों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए गए। लक्ष्य स्पष्ट है—समयसीमा के भीतर काम पूरा हो और उसका सीधा लाभ लोगों तक पहुंचे।
बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन संदेश एक ही रहा—अब प्रशासनिक कामकाज का पैमाना बदलेगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और दूरदृष्टि—तीनों पर एक साथ काम करना होगा, और वह भी जमीनी स्तर पर दिखना चाहिए।





