बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने तेंदूपत्ता वन लॉट की नीलामी में सफल खरीदारों से 2 प्रतिशत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) राशि की वसूली को चुनौती देने वाली सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने इस मामले में साझा आदेश सुनाते हुए राज्य शासन और छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया है।

ये खबर भी पढ़ें…
कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर बतौली की छात्राओं की पैदल मार्च की घटित घटना के जांच के लिए समिति गठित
कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर बतौली की छात्राओं की पैदल मार्च की घटित घटना के जांच के लिए समिति गठित
अम्बिकापुर/ कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर, विकासखण्ड बतौली की छात्राओं द्वारा 07 सितम्बर 2026 को आयोजित पैदल मार्च की...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अदालत के इस फैसले के बाद अब तेंदूपत्ता के व्यावसायिक खरीदारों को खरीद मूल्य की 2 प्रतिशत राशि एबीएस के रूप में जैव विविधता बोर्ड में जमा करानी होगी।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा 24 जनवरी 2023 को जारी आदेश और 25 जनवरी 2023 के परिणामी पत्र से जुड़ा था। इन आदेशों के तहत तेंदूपत्ता के सफल बोलीदाताओं से कुल खरीद मूल्य का 2 प्रतिशत एबीएस शुल्क वसूलने के निर्देश दिए गए थे।

ये खबर भी पढ़ें…
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
रायपुर/ शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क,...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता का व्यापार 1964 के तेंदूपत्ता व्यापार विनियमन अधिनियम के तहत पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में है।

खरीदार सीधे वनवासियों या संग्राहकों से तेंदूपत्ता नहीं खरीदते, बल्कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित वैधानिक नीलामी में हिस्सा लेकर लॉट खरीदते हैं। इसलिए उन पर जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत एबीएस शुल्क की देनदारी लागू नहीं होनी चाहिए।

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल,कई जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना, देखिए पूरी लिस्ट 
शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल,कई जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना, देखिए पूरी लिस्ट 
रायपुर ।स्कूल शिक्षा विभाग में  ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों सहित कई प्राचार्यों और शिक्षा विभाग...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि 1964 का तेंदूपत्ता कानून केवल इसके संग्रहण, खरीद और निपटान की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

जबकि जैव विविधता कानून, 2002 जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ के समान बंटवारे से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि दोनों कानून अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे के पूरक क्षेत्रों में काम करते हैं।

केवल इसलिए कि तेंदूपत्ता सरकारी नीलामी व्यवस्था के माध्यम से खरीदा गया है, व्यावसायिक उपयोग करने वाले खरीदार एबीएस के वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं हो जाते।

न्यायालय ने तेंदूपत्ता को एक प्रमुख जैव संसाधन (Bio-resource) मानते हुए कहा कि खरीद के बाद इसमें किसी प्रकार का प्रसंस्करण (Processing) या अन्य प्रक्रिया होने से भी इसका कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होता।

एकलपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि 24 नवंबर 2022 का पत्र, 24 जनवरी 2023 का आदेश और 25 जनवरी 2023 का परिणामी पत्र किसी भी प्रकार की अधिकार क्षेत्र की त्रुटि, अवैधानिकता या मनमानेपन से ग्रस्त नहीं हैं।

इसलिए इन आदेशों में हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है और सभी याचिकाएं निरस्त की जाती हैं। इस फैसले के साथ ही मामले से जुड़े सभी लंबित अंतरिम आवेदन भी समाप्त हो गए हैं, जिससे तेंदूपत्ता कारोबारियों के लिए एबीएस शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य हो गयाहै।