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कोयला चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई,कहानी अभी खत्म नहीं हुई है… असली सच सामने आना बाकी

सूरजपुर ।जिले की जगन्नाथपुर ओपन कास्ट खदान से जुड़े कोयला चोरी मामले में खड़गवां पुलिस ने कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाते हुए एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। इस प्रकरण में पुलिस ने दो अतिरिक्त ट्रक-ट्राला और कोयला लोड करने में प्रयुक्त एक पेलोडर को जब्त किया है, जिनकी कुल कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।

मालूम हो कि इससे पहले इसी मामले में खड़गवां पुलिस ने एक ट्रक-ट्राला, 43 टन चोरी का कोयला और तीन मोबाइल फोन जब्त करते हुए नीरज यादव, मनीष यादव और आशीष यादव को गिरफ्तार किया था। यह मामला चौकी खड़गवां थाना प्रतापपुर के अपराध क्रमांक 19/26, धारा 305(ख), 3(5) बीएनएस के तहत दर्ज है।

पुलिस के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 को जगन्नाथपुर ओपन कास्ट खदान से अवैध रूप से 43 टन कोयला चोरी किया गया था, जिसे चठिरमा क्षेत्र से ट्रक-ट्राला क्रमांक CG 10 BL 9649 के साथ बरामद किया गया था। प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस यह मानकर चल रही थी कि मामला सिर्फ तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है।

इसी बीच डीआईजी एवं एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर के निर्देश पर जांच को और गहराई से आगे बढ़ाया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन और डीएसपी अनूप एक्का के मार्गदर्शन में चल रही विवेचना के दौरान जगन्नाथपुर ओपन कास्ट खदान प्रबंधन की ओर से जांच में यह जानकारी सामने आई कि 13 जनवरी की रात करीब 1 बजे दो 18 चक्का ट्रक-ट्राला
CG 10 BS 2153 और CG 10 BT 5551 अवैध रूप से बूम बैरियर क्रॉस कर कोयला चोरी की नीयत से खदान के भीतर खड़े पाए गए थे।

खदान प्रबंधन से प्राप्त इस इनपुट और आगे की जांच के आधार पर शुक्रवार को पुलिस ने दोनों ट्रक-ट्राला के साथ कोयला लोड करने में प्रयुक्त एक पेलोडर को भी जब्त कर लिया। जब्त वाहनों और मशीनरी की अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये आंकी गई है।
पूरे मामले में डीआईजी प्रशांत कुमार ठाकुर की सक्रियता यह बताने के लिए काफी है कि पुलिस इसे सामान्य चोरी का केस मानकर नहीं चल रही। उनकी कार्य शैली और लगातार हो रही कार्रवाइयों से यह साफ है कि जांच की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं और भविष्य में इस प्रकरण में बड़े नामों की एंट्री चौंकाने वाली हो सकती है।

विवेचना के दौरान ओपन कास्ट खदान की सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लगी है, जिसके आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच तेज कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे कोयला चोरी प्रकरण में बिलासपुर एंगल की जांच भी लगातार जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खदान के बाहर बैठकर इस अवैध गतिविधि को संचालित करने वाला नेटवर्क कौन है और उसकी जड़ें कितनी गहरी हैं। इस कार्रवाई में चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह, प्रधान आरक्षक रजनीश त्रिपाठी, नंदकिशोर राजवाड़े और आरक्षक मनोज राय की सक्रिय भूमिका रही।

खदान से शुरू हुआ यह मामला अब जिला सीमा तक सीमित नहीं रह गया है। जिस तरह से जांच आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि यह कोयला चोरी प्रकरण आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल कार्रवाई जारी है, लेकिन यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है असली सच सामने आना बाकी है।

वहीं SECL मुख्यालय बिलासपुर और विश्रामपुर प्रक्षेत्र इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पर ताली बजाता जरूर नजर आ रहा है, लेकिन वह खुद इस खेल की जड़ों तक पहुंचने को कितना गंभीर है, यह अब भी एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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