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Madhya Pradesh

क्लासरूम छोड़ ‘डॉक्टर’ बन बैठा शिक्षक, बैतूल कलेक्टर ने किया निलंबित—क्लिनिक में मिलीं एलोपैथिक दवाएं और इंजेक्शन

बैतूल।मध्य प्रदेश में शिक्षक कई सरकारी जिम्मेदारियों में योगदान देते हैं, लेकिन बैतूल जिले में एक प्राइमरी शिक्षक ऐसी भूमिका निभाते हुए पकड़ा गया जो न सिर्फ नियमों के खिलाफ थी, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती थी।

शासन ने इस गंभीर अनियमितता पर सख्त कार्रवाई करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड स्थित प्राथमिक शाला कुण्डीखेड़ा में पदस्थ शिक्षक रघुनाथ फौजदार बिना किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टरी डिग्री के खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था।

उसने बाकायदा एक क्लिनिक खोल रखी थी, जहां लोग बीमारियों का उपचार कराने पहुंचते थे।

शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हुआ और जिले के सीएमएचओ ने एक विशेष जांच टीम गठित की।

8 नवंबर 2025 को टीम ने शिक्षक की कथित क्लिनिक पर छापा मारा। जांच के दौरान वहां एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, वायल, बायो मेडिकल वेस्ट और इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मिले, जिन्हें देखकर टीम हैरान रह गई। न तो उसके पास मेडिकल डिग्री थी और न ही कोई पंजीयन।

स्वास्थ्य विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर सीएमएचओ के माध्यम से कलेक्टर के पास भेजी। रिपोर्ट के आधार पर बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने प्राथमिक शिक्षक रघुनाथ फौजदार को निलंबित कर दिया।

आदेश में स्पष्ट कहा गया कि शिक्षक का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन करता है और कदाचार की श्रेणी में आता है।

इसी के तहत मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत यह निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

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