नशे की जब्ती पर तालियां, मगर सच अधूरा—झारखंड से रामानुजगंज तक किसकी शह पर पहुंचा ज़हर?
7.50 लाख की नशीली खेप पकड़ी, पर सवाल जस के तस—रामानुजगंज में ज़हर पहुंचाने वाला नेटवर्क कौन?

रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)।..सरगुजा संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने तीन आरोपियों से करीब 7.50 लाख रुपए मूल्य के नशीले इंजेक्शन और टैबलेट जब्त कर बड़ी कार्रवाई जरूर की है, लेकिन यह कार्रवाई जितनी बड़ी है, उससे कहीं बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—झारखंड से छत्तीसगढ़ में इतनी महंगी नशीली खेप आखिर किसकी निगरानी में, किसकी शह पर और कैसे दाखिल होती रही?
धान खरीदी के नाम पर सीमावर्ती इलाकों में सख्त जांच-पड़ताल के दावे किए जाते हैं, इसके बावजूद नगर पालिका रामानुजगंज से महज तीन किलोमीटर दूर पलटन घाट जैसे संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी खेप का पहुंचना कई सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
नशे की मार: बुझते चिराग, उजड़ते परिवार
बलरामपुर जिले में नशीले इंजेक्शन और टैबलेट की चपेट में आए युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पीड़ित परिजनों का दर्द यह है कि यह गोरखधंधा वर्षों से खुलेआम फल-फूल रहा है। परिवारों का कहना है कि कौन-कौन इसमें शामिल है, इसकी जानकारी पीड़ितों के पास है, लेकिन जांच एजेंसियों के हाथ खाली बताए जाते रहे। नतीजा—नशा हर दिन और गहराई से जड़ें जमाता गया।
नशीले इंजेक्शन का सीधा असर किडनी पर पड़ रहा है। कई पीड़ितों का इलाज रांची में चल रहा है। गरीब परिवार इलाज के बोझ तले कंगाली की कगार पर पहुंच चुके हैं।
आबकारी की कार्रवाई, सवाल बरकरार
सरगुजा संभागीय आबकारी टीम की कार्रवाई से पीड़ित परिवारों में उम्मीद जगी है। विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार 30 जनवरी 2026 को गढ़वा (झारखंड) निवासी अनूप गुप्ता और बतौली (सरगुजा) निवासी विनय गुप्ता के कब्जे से 1200 नग नशीले इंजेक्शन (करीब 6 लाख रुपए) जब्त कर जेल भेजा गया।
आरोपी अनूप गुप्ता के बयान के आधार पर खुलासा हुआ कि वह गढ़वा जिले के रंजीत विश्वकर्मा से नशीले इंजेक्शन खरीदता था, जिनकी सप्लाई में मंजूर अंसारी और प्रमोद कुमार शामिल थे। इसके बाद साइबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर 31 जनवरी 2026 की शाम रामानुजगंज थाना क्षेत्र के पलटन घाट में 1500 नग नशीले इंजेक्शन के साथ तीनों को गिरफ्तार किया गया। जब्त माल का बाजार मूल्य 7.50 लाख रुपए बताया गया।
अनूप गुप्ता और विनय गुप्ता को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी), 29 के तहत गिरफ्तार कर रामानुजगंज न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया।
श्रेय’ से पहले ‘जड़’ तक पहुंचना जरूरी
विभाग इस कार्रवाई का श्रेय ले रहा है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि जब तक रामानुजगंज क्षेत्र में इस धंधे को खड़ा रखने वाले स्थानीय नेटवर्क और कारोबारियों का खुलासा नहीं होता, तब तक यह लड़ाई अधूरी है। वर्षों से जिस गोरखधंधे की चर्चा आम है, जिन पैसों से गढ़वा के गोदरमाना में आलीशान निर्माण की बातें होती रहीं—उन पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं?





