बिलासपुर…सिविल लाइन थाने के सामने स्थित पुलिस लाइन मैदान में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह आयोजित हुआ। हजारों लोगों की मौजूदगी में तिरंगा शान से लहराया। मंच पर केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के साथ संभागायुक्त अनिल जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, आईजी रामगोपाल गर्ग और पुलिस कप्तान रजनेश सिंह समेत प्रशासन-पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे। मार्च पास्ट के बाद रंगारंग कार्यक्रम शुरू हुए तो पूरा मैदान देशभक्ति के उल्लास में डूब गया।

हजारों लोग अपने-अपने उत्सव में मग्न थे। कोई मार्च पास्ट देख रहा था, कोई रंगारंग प्रस्तुतियों में खोया था और बच्चे अपने ही संसार में मस्त थे। इसी भीड़ के बीच एक महिला पुलिसकर्मी अपनी अलग ही दोहरी जिम्मेदारी में नजर आई।

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एक हाथ में सुरक्षा जांच का स्कैनर था और दूसरी बांह में उसका करीब डेढ़-दो साल का थका हुआ मासूम। महिला पुलिसकर्मी लगातार आने-जाने वाले लोगों पर नजर रख रही थी। सामने हजारों लोगों की भीड़ थी और जिम्मेदारी थी उनकी सुरक्षा की। इसी बीच उसकी गोद में सिमटा बच्चा मां से चिपका आराम कर रहा था। रंगारंग कार्यक्रम चल रहे थे, देशभक्ति के गीत गूंज रहे थे, लेकिन उस मासूम के लिए उस वक्त मां की गोद ही सबसे सुरक्षित जगह थी।

मां की नजर भीड़ पर थी और बांहों का घेरा बच्चे के चारों ओर हजारों लोगों की सुरक्षा संभाल रही यह मां अपनी गोद में अपने बच्चे की पूरी दुनिया भी संभाले हुए थी।

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रंगारंग कार्यक्रम के दौरान भी उसकी ड्यूटी जारी रही। वह वर्दी में बच्चे को गोद में लिए अपनी जिम्मेदारी निभाती रही। बच्चा थकान में मां से सटा रहा और मां बिना ड्यूटी से हटे उसे संभालती रही।यही दृश्य इस पूरे समारोह की सबसे मानवीय तस्वीर बन गया।

मंच पर तिरंगा था। सामने हजारों लोग थे। देशभक्ति का उत्सव था। और भीड़ के बीच एक मां थी, जो एक साथ दो जिम्मेदारियां निभा रही थी—देश के प्रति कर्तव्य और अपनी गोद में सिमटे बच्चे के प्रति ममता।

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महिला पुलिसकर्मी किस थाने या किस इकाई से संबंधित हैं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। लेकिन उनकी पहचान से ज्यादा बड़ी उस तस्वीर की कहानी थी। क्योंकि उस तस्वीर में एक नाम नहीं, पूरी वर्दी के पीछे खड़ी मां दिखाई दे रही थी।

स्वतंत्रता दिवस पर हम तिरंगे को सलाम करते हैं, शहीदों को नमन करते हैं और देश की रक्षा करने वाले जवानों को सम्मान देते हैं। पुलिस लाइन मैदान की इस तस्वीर ने उस सम्मान में एक और भाव जोड़ दिया—

तिरंगे को सलाम तो है ही, उस मां को भी सलाम है, जो हजारों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी गोद में एक नन्ही जिंदगी को सुरक्षित रखे हुए थी।

एक तरफ हजारों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ एक मासूम की पूरी सुरक्षा। दोनों जिम्मेदारियां एक ही मां की बांहों में थीं। और शायद स्वतंत्रता दिवस की इस तस्वीर को याद रखने के लिए इससे ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं—
तिरंगे के साथ उस मां को भी सलाम।